गोंडा। जिले की एक ग्रामसभा में 14 साल पहले रास्ते की भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश का अब तक अनुपालन न होने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश जारी किया है। इसमें दोषियों पर कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकार को प्रदेश की ग्रामसभाओं में सार्वजनिक उपयोग की जमीनें अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया है। गोंडा निवासी सदाराम की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया है।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम बेसहूपुर निवासी सदाराम ने अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी के माध्यम से उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज ग्राम बेसहूपुर में रास्ते की भूमि पर गांव के सहजराम द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया। इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए 25 नवंबर 2008 को तत्कालीन तहसीलदार न्यायिक ने आदेश दिया था। मगर 14 साल बाद भी अवैध कब्जा नहीं हटाया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि साल 2008 में ही अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति प्रमुख सचिव राजस्व व जिलाधिकारी गोंडा को तीन दिन में भेजने का आदेश दिया।
अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी के अनुसार हाईकोर्ट ने अवैध कब्जों व अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेने की हिदायत देते हुए प्रमुख सचिव राजस्व को आदेश दिया है कि वह दिशा-निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित करें कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनें उसी उपयोग में आएं जिसके लिए वे राजस्व रिकार्ड में दर्ज हैं।