गोंडा। गर्म हवा व सूरज की तपिश के चलते दो महीने से लोग लू से जूझ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में हर रोज गर्मीजनित बीमारी से पीड़ित मरीज भर्ती हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अभी तक लू का कोई मरीज भर्ती ही नहीं हुआ। इसीलिए कोविड बिल्डिंग में बने 20 बेड के हीट स्ट्रोक वार्ड का ताला ही नहीं खोला गया।
मई महीने में गर्मी ने खूब परेशान किया। लोग चलते चलते गश खाकर गिर जाते और उन्हें भर्ती कराना पड़ा था। बुधवार को भी फातमा नगर काॅलोनी निवासी अपूर्वा (56), इमलिया गुरुदयाल निवासी केदारनाथ (42) मधनगरा निवासी स्वाती देवी (10) इमलिया गुरुदयाल निवासी पिंटू सोनी (30) को उल्ट-दस्त व पेट दर्द के कारण मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बनघुसरा निवासी शिवानी (18) को भी धूप लगने के कारण उल्टी दस्त की शिकायत के चलते भर्ती कराया गया। इसी प्रकार हर रोज 10 से अधिक मरीज गर्मीजनित बीमारी के चलते भर्ती हो रहे हैं। शासन के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज की कोविड बिल्डिंग में 20 बेड का हीट-स्ट्रोक वार्ड बनाया गया, लेकिन आज तक यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमडब्ल्यू खान का दावा है कि लू से पीड़ित एक भी मरीज नहीं भर्ती हुआ। गर्मी से डायरिया व अन्य बीमारी के मरीजों को हीट स्ट्रोक की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
बीपी घटा-बढ़ा रही है गर्मी
गर्मी के चलते लोगों का रक्तचाप (बीपी) अचानक घट या बढ़ जा रहा है। फिजीशियन डॉ. राकेश पांडेय के मुताबिक गर्मी के कारण दिमाग में कैटीकॉलामीन ज्यादा सक्रिय हो जाता है। इसके कारण दिमाग की तापमान नियंत्रण क्षमता प्रभावित हो जाती है। जिससे घबराहट, सांस फूलना, नाक से खून आना आदि लक्षण मरीजों में देखने को मिल रहे हैं।