गोंडा। पुलिस महकमा रिश्वतखोरी के दाग से हमेशा घिरा रहा है। घूसखोरी की चर्चाएं आम तो हैं ही खुलासे भी होते रहते हैं। दो महीने में ही तीन पुलिसकर्मी घूसखोरी में कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। इसके बावजूद घूसखोरी थम नहीं रही है।
इसी साल बीते 29 जून को ट्रक चालक से धन उगाही के मामले में एक दरोगा और सिपाही को निलंबित किया गया था। इसके बाद भी सीओ सिटी कार्यालय के पेशकार के घूस मांगने का मामला सामने आया तो पुलिस महकमे के हड़कंप मच गया। हालांकि आरोपी पेशकार के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। सीओ के पेशकार दिलीप प्रजापति ने जिस तरह दहेज हत्या के मुकदमे से बचाने के लिए तीन लाख रुपये की मांग की, उससे एसपी को उसे गिरफ्तार कराना पड़ा। इतनी बड़ी कार्रवाई बलिया कांड की गूंज से किए जाने की बात कही जा रही है।
गत 29 जून को ही वजीरगंज थाने के उपनिरीक्षक आनंद उपाध्याय ने ओवरलोड ट्रक के चालक से 10 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। उसने रिश्वत की रकम अपने भाई के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई थी। मामले में मुख्य आरक्षी स्वामीनाथ गौतम भी शामिल था। शिकायत पर एसपी ने सीओ से जांच कराने के बाद उपनिरीक्षक आनंद उपाध्याय व मुख्य आरक्षी स्वामीनाथ गौतम को निलंबित किया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने सबक नहीं लिया। सीओ सिटी कार्यालय तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में ही था। वहां ही घूसखोरी होने को एसपी ने गंभीर मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है।
सीओ का कारखास था पेशकार
पुलिस महकमे के लोगों की मानें तो घूस तय करने में माहिर कर्मी ही अफसरों की पसंद होते हैं। जिन्हें कारखास कहा जाता है। आरोपी पेशकार दिलीप प्रजापति भी तत्कालीन सीओ का कारखास था। ऐसे में अब तत्कालीन सीओ की भी जांच हो रही है। पेशकार दिलीप की गिरफ्तारी के बाद अब उससे जुडे़ किस्सों की एसपी कार्यालय में खूब चर्चा हो रही है।
पिछले साल भी घूसखोरी के कई मामले आए थे सामने
पुलिस महकमे में घूसखोरी कोई नई बात नहीं है। साल 2023 में भी कई मामले सामने आए थे। 20 जून 2023 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में ही स्थित अपराध शाखा के निरीक्षक अखिलेश यादव व सिपाही अखलाक अहमद ने फर्जी वसीयत के मामले में चार्जशीट भेजने के नाम पर चार हजार रुपये वसूले थे। वीडियो वायरल होने पर एसपी आकाश तोमर ने दोनों को निलंबित किया था। इसी तरह एलआईयू ऑफिस में कार्यरत सिपाही सूरज ने पासपोर्ट सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों से घूस वसूली थी। सत्यापन के लिए प्रति आवेदक से छह सौ रुपये का रेट तय कर रखा था। जनवरी 2023 में इसका वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद एसपी ने सिपाही सूरज को निलंबित किया था।
घूसखोरी के मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। पूरे मामले की जांच भी कराई जा रही है। सभी पुलिसकर्मियों को हिदायत दी गई है कि अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से करें अन्यथा कार्रवाई होगी।
विनीत जायसवाल, पुलिस अधीक्षक