गोंडा। जमीन बैनामा घोटाले में अब सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने की तैयारी पूरी हो गई है। जमीन घोटाले में जालसाजों के मददगार रहे सरकारी कर्मचारी अब एसआईटी के निशाने पर आ गए हैं। एसआईटी ने ऐसे आधा दर्जन कर्मचारियों की सूची तैयार की है जो जमीन बैनामा घोटाले में शामिल रहे हैं। अब एसआईटी की तफ्तीश का दायरा सरकारी कर्मचारियों तक बढ़ गया है।
निबंधन कार्यालय सदर में जमीन बैनामा घोटाले का मामला पकड़े जाने के बाद सब रजिस्ट्रार सुधा यादव ने कोतवाली नगर में एक महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसके बाद एआईजी मनोज कुमार श्रीवास्तव की जांच में 47 मामले बैनामा घोटाले के सामने आए थे। इसमें एक-एक करके अब तक 36 केस दर्ज हो चुके हैं। जिनकी एसआईटी तफ्तीश कर रही है। एसआईटी की तफ्तीश के दायरे में अब आधा दर्जन से अधिक सरकारी कर्मचारी आ गए हैं।
एसआईटी ने ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार की है। यही नहीं सरकारी कर्मचारियों समेत मुकदमों के आरोपियों के परिवार के 30 सदस्यों के संपत्ति का ब्योरा भी खंगाला गया है। एसआईटी जल्द ही आरोपित सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए हुकुम तहरीर जारी करेगी।
नगर पालिका परिषद में भी बिना जांच के सभासदों की ओर से जारी किए गए निवास प्रमाण पत्र के आधार पर पालिका प्रशासन जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर रहा है। ऐसा ही एक मामला एसआईटी की जांच में सामने आया है। जिसमें पंत नगर वार्ड के सभासद के निवास प्रमाण पत्र के आधार पर नगर पालिका प्रशासन ने वर्ष 2019 में एक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जो बाद में जिंदा निकली। एसआईटी इसकी भी जांच कर रही है। इसमें नगर पालिका के लिपिक के साथ ही तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जमीन बैनामा घोटाले की जांच एसआईटी कर रही है। इसमें आधा दर्जन से अधिक सरकारी कर्मचारियों के संलिप्त होने का साक्ष्य मिला है। जिसके आधार पर ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार की है। जल्द ही आरोपित कर्मचारियों की गिरफ्तारी कराई जाएगी।