गोंडा। रबी की फसलों में खाद डालने के लिए भटक रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। जिले को 57 हजार मीट्रिक टन खाद की खेप मिली है। जिससे साधन सहकारी समिति व दुकानों से खाद की किल्लत दूर हो जाएगी। दूसरी ओर खाद की कालाबाजारी व यूरिया के साथ जबरन जिंक देने की शिकायत पर अफसरों ने निगरानी बढ़ा दी है।
दो माह से खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। जिले में 57 हजार मीट्रिक टन (1,26,654 बोरी) खाद की खेप आ गई है। इससे साधन सहकारी समितियों व दुकानों पर खाद का पर्याप्त स्टॉक हो जाएगा।
उम्मीद जताई जा रही है कि अब गेहूं, आलू व अन्य शीतकालीन फसलों की बुआई करने वाले किसानों को अब खाद के लिए समितियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हालांकि सोमवार को भी किसानाें को खाद के लिए परेशान देखा गया।
अभी भी किसानों को यूरिया के साथ जिंक लेने पर मजबूर किया जा रहा है। जबकि जिला कृषि अधिकारी जेपी यादव ने बताया कि खाद का पर्याप्त स्टॉक मिल गया है। ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के साथ ही वह खुद दुकानों व समितियों का निरीक्षण कर रहे हैं। कहा कि कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी जेपी यादव का कहना है कि यूरिया के साथ जबरन जिंक व अन्य पाउडर बेचने वालों और सरकारी दर से अधिक दाम में खाद बेचने वालों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी भले ही खाद के साथ जिंक बेचने व सरकारी मूल्य से अधिक वसूलने पर सख्ती का दावा कर रहे हों, मगर अधिकांश बाजारों में दुकानदारों की मनमानी कम नहीं हुई है। शहर के पोर्टरगंज निवासी नागेंद्र व विनोद ने बताया कि पास की दुकान में वह खाद लेने गए तो एक बोरी के साथ एक पाउडर व जिंक का पैकेट थमा दिया गया। जिसके कारण उन्हें 125 रुपये अधिक चुकाने पड़े। इसी तरह इटियाथोक, जयप्रभा ग्राम, बाबागंज, दुबहा बाजार, कटुआ नाला, शहरिया चौराहा, उमरिया व मसकनवा में अभी भी यूरिया के साथ जिंक देने का सिलसिला जारी है।