गोंडा। रबी की फसलों की बुआई के लिए किसानों ने खेत तैयार कर लिए हैं, लेकिन खाद की किल्लत से बुआई पिछड़ती जा रही है। सहकारी समितियों पर ताला लटक गया, निजी दुकानों से भी अब डीएपी गायब होने लगी। जिन दुकानों पर कुछ स्टाक बचा है, वहां खाद महंगे दामों में बेची जा रही। जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जिले में पांच लाख किसान तकरीबन चार लाख हेक्टेयर में खेती करते हैं, जिनमें करीब दो लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें, गेहूं, गन्ना, सरसों, मटर, चना, लाही, जौ की बुुआई की जा जाती है। धान की कटाई कर शरद कालीन फसलों की बुआई के लिए खेत तैयार करने के बाद किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। बाजार में निजी दुुकानदार 1350 रुपये बोरी बिकने वाली डीएपी को 1500 रुपये बोरी तक बेच रहे हैं। वहीं 266 रुपये में बिकने वाली यूरिया 500 रुपये बोरी तक बिक रही है।
बाजार में दोगुने भाव में मिल रही खाद
क्षेत्र के साधन सहकारी समिति करनैलगंज, बरगदी कोट, चचरी व चकरौत पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र के करीब 20 हजार किसानों को भटकना पड़ रहा है। कटरा बाजार के साधन सहकारी समिति वीरपुर व समदरियनपुरवा में डीएपी नदारद है।
किसान रामचंदर ने बताया कि सरसों, गेहूं, मसूर की बुआई करने के लिए एक बीघे में करीब 20 किलो यूरिया की जरूरत पड़ती है। समितियों पर खाद न होने के कारण 200 रुपये बोरी महंगी खाद खरीदना पड़ रहा। मोतीगंज क्षेत्र में सहकारी समितियों व निजी दुकानों पर भी डीएपी नहीं मिल रही। पीसीएफ गोदाम प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि दो दिनों में खाद आ जाएगी।
मनकापुर के साधन सहकारी समिति भिटौरा में बुधवार को ताला लटक रहा था। सचिव कमलेश मौर्य ने बताया कि एक-दो दिन में डीएपी मिलने लगेगी। इटियाथोक के साधन सहकारी समिति देवतहा में कई दिनों से डीएपी नहीं है। किसान रामनारायन यादव ने बताया कि गेहूं, सरसो व आलू की बुआई पिछड़ रही है। गोदाम प्रभारी मदन मोहन तिवारी ने बताया कि दो दिनों में खाद आ जाएगी।
पिछड़ गई बुआई तो होगा नुकसान
मनकापुर की किसान सरिता पांडेय ने बताया कि मौसम की मार से धान की फसल बर्बाद हो गई थी, अब खाद न मिलने के कारण गेंहू की बुआई भी पिछड़ जाएगी तो पैदावार में काफी कमी आ जाएगी।
किसान मो. शरीफ ने बताया कि आलू व गेहूं की बुआई की जानी है, लेकिन खाद न मिलने के कारण निजी दुकानों पर महंगे दामों में खरीदना पड़ रहा है।
किसान संतराम ने बताया कि खाद की किल्लत से रबी की बुआई पिछड़ रही है।
किसान रोहित कुमार ने बताया कि जो भी दुकानदार डाई का स्टाक रखे हुए हैं, वह खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं।
रैक आने के बाद किल्लत होगी दूर
जिले में खाद की उपलब्धता का प्रयास किया जा रहा है, गुरुवार सुबह तक करीब 2732 एमटी खाद की रैक आ जाएगी। जिससे जिले में खाद की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अभी भी अधिकांश दुकानों व गोदामों पर खाद मिल रही है।
जगदीश यादव, जिला कृषि अधिकारी