गोंडा। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल जन आरोग्य मेला सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गया। रविवार को अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दोपहर बाद ताला लटकता मिला। मेले में आने वाले मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। वहीं, कई स्थानों पर बिना जांच किए दवा देकर वापस कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक रविवार को जिले के 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनआरोग्य मेला आयोजित कर मरीजों का इलाज करने का दावा किया जा रहा। सरकारी दावे के अनुसार, मेले में मरीजों का जांच कर इलाज किया जाता है, साथ ही सभी योजनाओं का काउंटर बनाकर लाभार्थियों का पंजीकरण किया जाता है। जमीनी हकीकत सरकारी दावे से इतर है। रविवार की दोपहर बाद अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटक गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलसर के पीएचसी माधवपुर में दोपहर 2.30 बजे ताला लटकता रहा। वहीं बेलसर के अन्य पीएचसी पर भी कर्मचारी नदारद मिले।
गांव के कुछ लोग सर्दी-जुकाम से पीड़ित मरीज मेले में पहुंचे तो ताला लटकता देख वापस आना पड़ा। पीएचसी के पास रहने वाले लल्लन शुक्ल ने बताया कि मेले में डॉक्टर 11 बजे तक पहुंचते हैं, कुछ देर रुकने के बाद ताला बंद करके चले जाते हैं। इटियाथोक, रुपईडीह, बेलसर, करनैलगंज, कटरा बाजार सीएचसी के अंर्तगत आने वाले अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दोपहर बाद ताला लटक गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया के पीएचसी मसकनवा, बीरपुर, बभनान में कुल 112 मरीजों का उपचार किया गया।
वहीं, मसकनवा में नौ तथा वीरपुर में 17 लोगों की जांच की गई। गर्भवतियों को आयरन, कैल्शियम व अन्य दवाएं वितरित की गई। स्वास्थ्य मेले में डॉ. संजय कुमार, डॉ. पवन पटवा, डॉ. मोहम्मद आदिल, फार्मासिस्ट रमेश यादव, केके तिवारी, छांगुर प्रसाद, अरूण कुमार, अनूप कुमार, आशा संगिनी रेखा मिश्रा, जानकी देवी, पुष्पा शुक्ला आदि रही।
दूसरी ओर एसीएमओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि आरोग्य मेले का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक है। इस दौरान सभी डॉक्टरों व कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य है।