गोंडा। मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन की ओर से घटिया दवाएं बांटे जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। दर्द की अद्योमानक दवाओं के बाद अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिर्गी की घटिया दवा बांटने का मामला सामने आया है। कारपोरेशन की ओर से गोंडा, बलरामपुर, बहराइच समेत प्रदेश के 49 जिलों में सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बांटने के लिए भेजी गई मिर्गी की दवाई लैब जांच में फेल आई है। जांच में इस दवा को मानक की कसौटी पर खरा न पाए जाने पर घटिया माना गया। लैब की फेल रिपोर्ट के बाद चेते कोरपोरेशन व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आनन-फानन में मिर्गी की उक्त दवा के वितरण पर रोक लगा दी है। हालांकि अब तक अस्पतालों में वितरण को पहुंची उक्त बैच की अधिकांश दवाएं मरीजों को बांटी जा चुकी है।
इससे पहले अगस्त 2022 में दर्द की दवा (एक्लोफिनेक) भी लैब जांच में अधोमानक पाई गई थी। अब मिर्गी के मरीजों को सरकारी अस्पतालों से इलाज के लिए मुफ्त बांटी जाने वाली दवा क्लोबाजम 5-एमजी (बैच नंबर सीएलओ-2101) का नमूना लैब जांच में फेल पाया गया है। मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन ने छह जुलाई 2021 को दिल्ली की मेसर्स रिडले लाइफ साइंस कंपनी से मिर्गी के इलाज में इस्तेमाल आने वाली क्लोबाजम 5-एमजी की दवा खरीद कर इसे गोंडा समेत प्रदेश के 49 जिलों के औषधि भंडारों को भेजा गया था। मानसिक चिकित्सालय बरेली के औषधि भंडार से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के औषधि निरीक्षक की ओर से मिर्गी की उक्त दवा का नमूना लेकर लैब जांच के लिए भेजा गया था। एफएसडीए की राजकीय औषधि विश्लेषक लैब में हुई जांच के बाद उक्त दवा का नमूना घटिया पाए जाने पर रिपोर्ट में फेल आया है।
लैब की जांच रिपोर्ट के बाद गुणवत्ता नियंत्रक महाप्रबंधक के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सप्लाइज कारपोरेशन ने सभी जिलों के जनपदीय वेयर हाउस प्रभारियों को पत्र भेजकर क्लोबाजम 5-एमजी (बैच नंबर सीएलओ-2101) के वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा गया है। साथ ही कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य इकाईयों से संबंधित बैच नंबर की दवाई वापस ले कर उन्हें वेयर हाउस में रखी दवाओं से अलग कर दिया जाए।
खिलाई जा चुकी 11,400 घटिया टैबलेट
मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन की ओर से सितंबर 2021 को गोंडा जिले में क्लोबाजम 5-एमजी की 70 हजार टैबलेट भेजी गई थी। जिला अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर मिर्गी मरीजों को अब तक उक्त दवा की 11400 टैबलेट बांटी जा चुकी हैं। मंडलीय ड्रग वेयर हाउस प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि बची हुई दवाओं को स्वास्थ्य केंद्रों से वापस मंगाया जा रहा है तथा वेयर हाउस में रखी दवाओं को अलग कर कारपोरेशन को भेज दिया जाएगा।
इन जिलों में हुई घटिया दवा की आपूर्ति
मिर्गी की दवा क्लोबाजम 5-एमजी (बैच नंबर सीएलओ-2101) की खेप गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर,अमरोहा, हाथरस, कासगंज, बांदा, औरैया, कौशांबी, ललितपुर, झांसी, कन्नौज, फरुखाबाद, हापुड़ व कानपुर देहात में संचालित सरकारी अस्पतालों को भेजी गयी। इसके साथ बागपत,चंदौली, गौतबुद्ध नगर, इटावा, महाराजगंज, अमेठी, कुशीनगर, बस्ती, फतेहपुर,एटा, अंबेडकरनगर, फिरोजाबाद, बलिया, देवरिया, बाराबंकी, बुलंदशहर, अयोध्या, गाजीपुर, बरेली, आगरा, बिजनौर, बंदायु, गोरखपुर, अलीगढ़, हरदोई, कानपुर नगर, आजमगढ़, लखीमपुर, जौनपुर, गाजियाबाद व लखनऊ में इस बैच की दवा मिर्गी के मरीजों को बांटी गई।
जांच में नमूना फेल
क्लोबाजम 5-एमजी (बैच नंबर सीएलओ-2101) का नूमना लैब जांच में फेल आया है। इसके आधार पर ही मंडलीय स्तर पर संबंधित बैच की दवा का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है तथा बची हुई दवाएं स्वास्थ्य इकाईयों से वापस मंगाई जा रही हैं। डॉ. अनिल मिश्र, अपर निदेशक चिकित्सा