गोंडा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जनपद न्यायाधीश ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता व राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी डॉ. दीनानाथ की उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 58524 वाद निस्तारित किये गए। न्यायिक अधिकारियों ने 5335 वाद निस्तारित कर 22.77 लाख रुपए अर्थदंड के रूप में वसूल किया। प्री-लिटीगेशन के माध्यम से 53189 वादों का निस्तारण कर सात करोड़ 43 लाख पचहत्तर हजार पांच सौ पांच रुपये की समझौता राशि तय की गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विश्वजीत सिंह ने बताया कि जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेन्द्र मणि त्रिपाठी ने 12, प्रथम अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती पूजा सिंह ने पांच, द्वितीय अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश नासिर अहमद ने तीन, तृतीय अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार ने दो, चतुर्थ अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश डॉ पल्लवी अग्रवाल ने 27, नवम अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह ने एक, अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम डॉ दीनानाथ ने 11, अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट चन्द्र मोहन चतुर्वेदी ने 15, अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय नितिन श्रीवास्तव ने चार वाद का निस्तारण कर अर्थदंड लगाया।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी डा. अनुपमा गोपाल निगम ने 57 वादों का निस्तारण कर दो करोड़ 24 लाख 68 हजार 707 रुपए प्रतिकर राशि तय की। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रीता गुप्ता ने 67 व प्रथम अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कु. आफसां ने 21 वादों का निस्तारण किया। मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी चिर कुमारित्वा, सिविल जज अनुपम शौर्य ने 19 वाद निस्तारित करते हुए एक करोड़ 67 लाख सात हजार 403 रुपए का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया।
इसके अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रामानन्द ने सात वाद निस्तारित करते हुए चार लाख 94 हजार 778 रुपए समझौता राशि तय की। जनपद के समस्त विभागों में प्री-लिटीगेशन के माध्यम से 53189 वादों का निस्तारण कर सात करोड़ 43 लाख 75 हजार पांच सौ पांच रुपए की समझौता राशि तय की गई।
इस अवसर पर न्यायिक अधिकारी सुषमा, अर्चना, सौम्या मिश्रा, सत्य प्रकाश नारायण तिवारी, आंचल चन्देल, निधि वर्मा, रविन्द्र कुमार रावत, रविकान्त, सन्देश कुमार पासवान, सोनम गौतम, वीनस कुमार, हर्ष आनंद, बैंक अधिकारी, अधिवक्ता, न्यायालय के कर्मचारीगण व भारी संख्या में वादकारी आदि उपस्थित रहे।