गोंडा। जिले में वक्फ की संपत्तियों के सर्वे के लिए चार सौ से अधिक राजस्व की टीमें जुटाई गई हैं। तहसील स्तर पर गठित राजस्व व अल्पसंख्यक विभाग संयुक्त टीमें एक माह में सर्वे निरीक्षण का कार्य पूरा कर अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी। अल्पसंख्यक विभाग की जिला इकाई के अनुसार जिले में 1984 में हुए राज्यपाल के गजट के अनुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड की 2205 और शिया बोर्ड की 26 संपत्तियां गोंडा व बलरामपुर में चिन्हित हुई थी। इसके बाद जारी शासनादेश के तहत दोनों वक्फ बोर्ड में करीब चार हजार और संपत्तियों के शामिल होने का अंदेशा है। इसकी तस्वीर विभागीय स्तर पर तहसीलवार तैयार करायी जा रही सूची बनने के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।
खाली पड़ी बंजर, ऊसर व भीटा में दर्ज जमीनों को वर्ष 1989 में जारी शासनादेश के तहत सीधे वक्फ में शामिल कर लिया गया था। इसमें बरती गयी मनमानी के चलते बड़ी हजारों बीघा जमीन को तहसील कर्मियों की साठगांठ से वक्फ में दर्ज कर अवैध कब्जा कर जमकर कमाई भी हुई। अब सर्वे व परीक्षण में वक्फ में दर्ज ऐसी खाली पड़ी जमीनों के स्वामित्व का फिर से सर्वे सत्यापन कर उन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए होने वाले निर्माण कार्य अथवा अन्य कार्य में इस्तेमाल करने का रास्ता साफ होगा। डीएम के निर्देश पर जिले की चारों तहसीलों में वक्फ की संपत्तियों के सर्वे के लिए एसडीएम की अुगवाई में संयुक्त तौर पर राजस्व निरीक्षकों व अल्पसंख्यक विभाग के कर्मियों की चार सौ टीमें गठित की गयी है। यह टीमें वक्फ की संपत्तियों का सर्वे कर इनके स्वामित्व का मिलान भी राजस्व अभिलेखों से करेगी।
शासन के आदेश पर वक्फ की संपत्तियों के सर्वे की कार्रवाई तहसीलवार स्तर पर संयुक्त टीम गठित कर शुरू कराई जा रही है। 1984 में हुए राज्यपाल के गजट के अनुसार सुन्नी बोर्ड 2205 और शिया बोर्ड की 26 संपत्तियां गोंडा व बलरामपुर में वक्फ में चिन्हित थी। इसके बाद जारी शासनादेश के तहत वक्फ में शामिल हुई करीब चार हजार अन्य भू संपत्तियों का विवरण तहसीलवार स्तर पर जुटाया जा रहा है। - गौरव स्वर्णकार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी