तरबगंज (गोंडा)। तहसील परिसर स्थित उप निबंधक कार्यालय के पास वकील की बनी बैठकी में मंगलवार की देररात अचानक आग लग गई। लपटों आसपास के भी अन्य वकीलों के तख्त (बैठकी) को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों व राहगीरों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया।
मंगलवार रात करीब नौ बजे लगी देखते ही देखते वकील की एक बैठकी धू-धूकर जलने लगी, लेकिन आग की लपटें जब तक आसपास की झोपड़ियों व उप निबंधक कार्यालय को अपनी चपेट में लेतीं तब तक स्थानीय लोगों व राहगीरों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया।
अग्निकांड में सेमरा निवासी व दस्तावेज लेखक रवींद्र लाल श्रीवास्तव की फूस की झोपड़ी व तख्त आदि जल गए। उप निबंधक कार्यालय में आग पहुंचने से पहले ही उसपर काबू पा लिया गया नहीं तो महत्वपूर्ण बैनामे के दस्तावेज राख हो सकते थे।
पहले भी जल चुके जरूरी दस्तावेज
दशकों पहले सितंबर 2009 में भी तहसील के अभिलेखागार में आग लगने से नामांतर बही कानूनगो सर्किल उमरी, तमाम पट्टा की पत्रावलियां व अन्य अभिलेख जल गए थे। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मामले में एसडीएम स्टेनो व राजस्व निरीक्षक को बर्खास्त भी किया गया था।
उप निबंधक कार्यालय के पास झोपड़ियों का जाल
उप निबंधक कार्यालय के आसपास करीब एक दर्जन फूस की झोपड़िया रखी गई हैं। इन झोपड़ियों में अधिवक्ता व दस्तावेज लेखक अपना चैंबर बना रखे हैं। होटल भी चल रहे हैं। किसी भी झोपड़ी में लगी एक चिंगारी से उठी आग की लपटें उप निबंधक कार्यालय को चपेट में ले सकती हैं।
नहीं स्थापित हुआ अग्निशमन केंद्र
तरबगंज विधानसभा का गठन हुए एक दशक से अधिक का समय गुजर चुका है। यहां अभी तक अग्निशमन केंद्र नहीं स्थापित किया जा सका है। अधिवक्ता जटा शंकर सिंह, विनोद पाठक, सुरेंद्र सिंह, दीनबंधु पांडेय, स्वामी नाथ रावत, रुद्र नारायण शुक्ला, सुनील तिवारी ने कहा कि मुख्यालय पर अग्निशमन केंद्र की स्थापना अति आवश्यक है।
तहसील के बाहर आग लगने की जानकारी हुई है, तहसील में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई है। रात में ही आग पर काबू हो गया था। सर्तकता बरतने के निर्देश तहसील कर्मियों को दिए गए हैं। शत्रोहन पाठक, एसडीएम तरबगंज