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डेंगू के आठ नए मरीज मिले, बुखार में तप रहे सैकड़ों

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गोंडा के सीएचसी मनकापुर में इमरजेंसी में खाली डॉक्टर की कुर्सी। -संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिले में डेंगू व वायरल बुखार कहर बरपा रहा है, हर रोज सैकड़ों लोग तेज बुखार से पीड़ित होकर सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। रविवार को डेंगू के आठ मरीजों की पुष्टि हुई। इसके साथ ही डेंगू संक्रमितों की संख्या बढ़कर 81 पहुंच गई है। वहीं सैकड़ों लोग बुखार से तपते हुए निजी अस्पतालों में पड़े हुए हैं। डेंगू के खिलाफ सरकारी लड़ाई केवल कागजों तक ही सीमित रह गई। अस्पतालों की इमरजेंसी तक में डॉक्टर नहीं मिलते, जिससे गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ रही है। सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते डेंगू व वायरल बुखार बेकाबू होता जा रहा है। विभाग बस बैठकों में ही ऑल इज वेल बताकर खुद की पीठ थपथपा रहा है।
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सीएचसी मनकापुर में रविवार दोपहर बारह बजे इमरजेंसी तक में डॉक्टर की कुर्सी खाली रही। अधीक्षक के कक्ष में ताला लटक रहा था। इमरजेंसी में बैठे फार्मासिस्ट जनार्दन वर्मा ने बताया कि रविवार को इमरजेंसी में डॉ. रविश रिजवी की ड्यूटी है, लेकिन वह ऑन कॉल ही आते हैं। उन्होंनेे बता रखा है कि जब तीन-चार मरीज इकट्ठा हो जाएंगे, तभी कॉल करना। सुबह आए थे एक मरीज देखकर चले गए। इसी कारण अस्पताल में कोई मरीज भर्ती नहीं मिला। फोन पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. डीके भास्कर ने बताया कि उनके यहां अभी तक डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला है। इसी तरह सीएचसी कटरा बाजार में डेंगू को देखते हुए रविवार को भी ओपीडी होती रही। दो बजे तक चार मरीजों का इलाज किया गया। सीएचसी इटियाथोक पर भी डॉ. एसके प्रजापति ड्यूटी पर रहे। उन्होंने दो मरीजों का इलाज किया। वहीं रुपईडीह, बेलसर, काजीदेवर, बेलसर, परसपुर आदि स्थानों पर रविवार के दिन मरीजों को भटकना पड़ा।
झोलाछाप के इलाज से मरीजों की जा रही जान
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर न मिलने से बुखार पीड़ितों को झोलाछाप की शरण में जाना पड़ रहा है। जहां बेंच पर लिटाकर ड्रिप चढ़ा दिया जाता है। झोलाछाप के इलाज से कई लोगों की सेहत बिगड़ने के साथ उनकी जान तक जा रही है। जिले के परसिया रानीपुर निवासी लक्ष्मी देवी बृहस्पतिवार से ही तेज बुखार से पीड़ित थीं। स्थानीय झोलाछाप ने भर्ती कर ड्रिप चढ़ाया और घर वापस भेज दिया। जहां रविवार सुबह मौत हो गई। वहीं बैरीपुर रामनाथ निवासी मन्नू तिवारी का भी तेज बुखार के चलते स्थानीय चिकित्सक से इलाज कराया गया। उनकी हालत बिगड़ी तो सीएचसी मनकापुर ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में इमरजेंसी में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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गांवों में नहीं जा रहीं स्वास्थ्य टीमें
जिले के लगभग सभी गांवों में लोग बुखार से तप रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमार होकर बिस्तर पर पड़े हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में जाकर बुखार पीड़ितों की निगरानी व जांच करवाना मुनासिब नहीं समझती। जब डेंगू के किसी मरीज की सरकारी अस्पताल में पुष्टि हो जाती है तो टीम उसके घर जाकर कागजी कार्रवाई कर इतिश्री कर देती है। वहीं पंचायतों की ओर से फॉगिंग व छिड़काव भी गांवों के नसीब में नहीं है। यहां भगवान भरोसे लोग संक्रामक बीमारियों के खिलाफ लड़ रहे हैं।
जिले में संक्रामक बीमारियों की स्थिति
डेंगू-81
मलेरिया-13
बुखार- 1400
कोविड-08
चर्म रोग- 3100
डेंगू के प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। सीएमओ कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम सक्रिय है। किसी भी गांव में बुखार पीड़ितों की संख्या अधिक होने की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य टीमें वहां जाकर मरीजों की जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई करती हैं। डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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