गोंडा। नए साल में गर्भवती को महिला अस्पताल में कई सुविधाएं मिलने वाली है। जिससे उनकी समस्याएं दूर होंगी। अभी तक पर्चा बनाने के लिए गर्भवती को लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ता था। कंप्यूटर से पर्चा बनने की व्यवस्था होगी, और काउंटर भी बढ़ेंगे। अभी तक जांच कराने के लिए गर्भवती महिलाओं को चौथी मंजिल पर जाना होता था। उससे छुटकारा के लिए भूतल पर ही जांच की सुविधा की तैयारी हो रही है।
महिला अस्पताल में ओपीडी पर्चा काउंटर की संख्या बढ़ाने के साथ कंप्यूटर से मरीजों का पंजीकरण होगा। ओपीडी के बाहर टोकन डिस्प्ले बोर्ड पर मरीजों का नंबर दर्शाया जाएगा। जिससे अपनी बारी आने तक गर्भवती कुर्सियों पर बैठी रह सकती हैं। प्रसव पूर्व जांच करवाने के लिए चौथे मंजिल पर नहीं जाना पड़ेगा। सभी जांच की सुविधा भूतल (ग्राउंड) तल पर किए जाने की कवायद हो रही है।
महिला अस्पताल को कंप्यूटरीकृत कर ई-हॉस्पिटल के रूप में तैयार किया जाएगा। ओपीडी के सामने लाइन में लगने के बाद डॉक्टर तक पहुंच पाती थी। नए साल में अस्पताल को कंप्यूटरीकृत कर गर्भवतियों को लंबी कतारों से निजात दिलाया जाना है। जिसके लिए कंप्यूटर, प्रिंटर, एलईडी स्क्रीन व टोकन डिस्प्ले बोर्ड की खरीद की गई है।
अस्पताल में तीन ओपीडी पर्चा काउंटर बनाए जाएंगे, जिसमें कंप्यूटर पर मरीजों का विवरण दर्ज होगा। दूसरी बार दिखाने आने पर मरीजों को सिर्फ पंजीकरण नंबर बताने से पर्चा बन जाएगा। जिससे गर्भवतियों को लंबी कतारों में लगने से सहूलियत मिलेगी।
हर दिन 700 मरीजों का होता है इलाज
महिला अस्पताल में नए और पुराने करीब सात सौ मरीज हर दिन महिला अस्पताल में आते हैं। इसमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं होती हैं। अभी तक पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक मशक्कत करनी पड़ती है। नई सुविधाओं के शुरू होने से काफी हद तक सुविधाएं हासिल हो सकेंगी। इससे मरीजों की परेशानियां कम होने की उम्मीद है।
आसानी से मिलेगी मरीज की हिस्ट्री
जिला महिला अस्पताल को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। मरीजों का रिकार्ड कंप्यूटर में दर्ज रहेगा। जिससे गर्भवती व नवजात के इलाज, टीकाकरण आदि हिस्ट्री आसानी से खोजी जा सकेगी। मरीजों को लंबी कतार में नहीं लगना पड़ेगा। अस्पताल को कायाकल्प के लिए 3.75 लाख रुपये मिलेगा, जो अस्पताल के बेहतरी के लिए खर्च किया जाएगा। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल