गोंडा। प्राकृतिक की मार ने इस बार किसानों की कमर तोड़ दी। सूखा, बाढ़ व बारिश की तेहरी मार से बर्बाद हो चुकी फसलों को देख अन्न दाताओं की आंखों से बरबस ही आंसू निकल रहे हैं। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान और सब्जी की फसलें तबाह हो गई। गन्ना, मक्का व अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ। किसानों के जख्म पर मुआवजे का मरहम लगाने के लिए अब नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
जिले के पांच लाख किसानों को बाढ़ और बारिश से शिकार होना पड़ा। महीने भर पहले जहां 1.28 लाख हेक्टेयर में लगी धान की फसल सूखने से बची तो बाढ़ व बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ गई। जिले के तरबगंज, बेलसर, परसपुर, करनैलगंज, नवाबगंज व रुपईडीह विकासखंड में बाढ़ के प्रकोप से फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई। करीब 20 हजार हेक्टेयर में उगाई गई सब्जी की फसलें बर्बाद हो गई। इसी तरह गन्ना, मक्का व अन्य फसलें खेतों में गिर र्गइं।
21,509 किसानों को ही मिलेगा मुआवजा
जिले में बाढ़, सूखा व बारिश से लाखों किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। मगर सिर्फ 21,509 किसानों को मुआवजा मिलेगा। जिला कृषि अधिकारी जेपी यादव ने बताया कि बारिश व बाढ़ से हुए फसलों के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। यदि खेत से पानी निकल गया तो धान की फसल में 10 से 15 फीसदी का नुकसान होने की आशंका है। जबकि, गन्ना व अन्य फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। कृषि विभाग की ओर से किसानों को मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, 21,509 किसानों का बीमा है, जिन्हें बीमा कंपनियां मुआवजा देंगी। वहीं जिन किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, उनके लिए राजस्व विभाग कुछ मुआवजा देगा।
बढ़कर मिलेगा मुआवजा
किसानों के फसलों को 33 फीसदी नुकसान पर सिंचित क्षेत्रों में 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाएगा। वहीं पशुपालकों व मत्स्य पालकों को भी मुआवजा उनके खाते में भेजा जाएगा।