गोंडा। वजीरगंज के दुर्जनपुर गांव की सायरुन निशा ने बेटे मो. नसीम को जन्म ही नहीं दिया, दूसरा जीवन भी दे दिया। किडनी फेल होने से गंभीर रूप से बीमार नसीम को सायरुन निशा ने अपनी एक किडनी देकर जान बचाई है।
वजीरगंज क्षेत्र के दुर्जनपुर निवासी मो. नसीम (22) लंबे समय से बीमार चल रहा था। एक साल पहले डाॅक्टरों ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी थी मगर आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिजन किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करा सके। हालत बिगड़ती देख नमीम की मां सायरुन निशा (48) ने उसे किडनी देने की ठान ली। ऑपरेशन का खर्च जुटाने के लिए गांव के हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया। इसके बाद लखनऊ के एक निजी अस्पताल में नसीम को भर्ती कराकर इलाज कराया गया।
सीनियर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. दीपक दीवान ने बताया कि गत 25 मार्च को सायरुन निशा की एक किडनी निकालकर उनके बेटे नसीम को प्रत्यारोपित कर दी गई। अब दोनों स्वस्थ हैं। 11 अप्रैल को नसीम हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होंगे।
सायरुन निशा के पति की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि बेटे को किडनी देकर कोई बड़ा काम नहीं किया है। बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान भी चली जाए तो कोई चिंता नहीं। मां-बेटे का प्रेम देख गांव के लोग भी अभीभूत हैं।