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यहां मुर्दों ने कर दी वसीयत: अंबेडकरनगर में वरासत और गोंडा में हो गई वसीयत, तीन रजिस्ट्री दफ्तर में हुआ खेल

Mon, 28 Nov 2022 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा

सार

जिले के तीन रजिस्ट्री दफ्तरों (गोंडा सदर, करनैलगंज व तरबगंज) में वसीयत बनाने में बड़े स्तर पर खेल हुआ। गुजरे साल भी फर्जी वसीयत का मामला उजागर हुआ था। इसमें नौ वसीयत ऐसी की गई जिसमें वसीयत करने वाले की मौत पहले ही हो चुकी थी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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गोंडा के रजिस्ट्री दफ्तर में सिर्फ बैनामा ही फर्जी नहीं किया जाता, यहां आदमी की वसीयत भी उसके मरने के बाद बना दी जाती है। जबकि वसीयत मरने के पहले ही व्यक्ति करता है, मरने के बाद वरासत होती है। जिले के अलावा बस्ती, आजमगढ़, बलिया और गोरखपुर तक के लोगों की फर्जी वसीयत यहां बनाई गई।
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जिले के तीन रजिस्ट्री दफ्तरों (गोंडा सदर, करनैलगंज व तरबगंज) में वसीयत बनाने में बड़े स्तर पर खेल हुआ। गुजरे साल भी फर्जी वसीयत का मामला उजागर हुआ था। इसमें नौ वसीयत ऐसी की गई जिसमें वसीयत करने वाले की मौत पहले ही हो चुकी थी। आजमगढ़ के थाना सिधारी अंतर्गत ग्राम बैठोली निवासी रिंकी सिंह की शिकायत पर हुई जांच में फर्जी वसीयतनामा को पति के मरणोपरांत गोंडा के तत्कालीन उपनिबंधक ने नौ जनवरी 2019 को पंजीकृत कर दिया।

इसी तरह हुई जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि गोंडा उपनिबंधन कार्यालय में चार, करनैलगंज में तीन व तरबगंज में दो मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण के मामले सामने आए। इसमें बस्ती के पाऊतप्पा कनैला गांव के राम नारायण पांडेय की मृत्यु साल 1996 में हो गई थी, उनकी वसीयत साल 2018 में सदर तहसील में की गई। इसी तरह गोरखपुर के सोहगौरा तहसील बांसगांव के विंध्याचल गुप्ता की मौत साल 2017 में हो गई थी। उनकी वसीयत भी गोंडा सदर रजिस्ट्री दफ्तर में साल 2019 में की गई। इसी तरह कई जिलों के लोगों की वसीयत जिले के रजिस्ट्री दफ्तरों में हुई। ये सारे तथ्य जांच में सामने आए हैं।
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अंबेडकरनगर में वरासत और गोंडा में हो गई वसीयत
अंबेडकरनगर के वीरेंद्र कुमार मिश्रा जो गन्ना विकास निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे, उनका निधन साल 2010 में हुआ था। अंबेडकरनगर में उनकी पत्नी व दो बच्चों के नाम प्रशासन ने वरासत की कार्यवाही कर दी। जब 21 अप्रैल 2012 को परिजनों ने खतौनी निकालने का प्रयास किया तो पता चला कि वसीयत पहले ही हो चुकी है। वसीयत 16 अगस्त 2011 को गोंडा के करनैलगंज रजिस्ट्री दफ्तर में हुई। इसके खुलासे के बाद परिजन अब हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

दूसरे रजिस्ट्री दफ्तरों में पंजीकरण का कारण भी नहीं बताया
मृत्यु के बाद वसीयत के मामलों में नियमों की अनदेखी बड़े स्तर पर की गई। एक तो वसीयत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया, वहीं वसीयत की सूचनाओं के प्रकाशन में भी बड़े स्तर पर खेल हुए। निस्तारण के समय यह भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई कि आखिर दूसरे रजिस्ट्री दफ्तरों में लोग वसीयत क्यों करा रहे हैं। जबकि यह स्पष्ट करना होता है कि दूसरे तहसील का वसीयत पंजीकरण किन परिस्थितियों में करना पड़ रहा है।

वसीयत के मामलों की जांच पहले हो चुकी है। कार्रवाई भी की गई थी, जो भी मामले आते है, उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। -सुरेश कुमार सोनी, अपर जिलाधिकारी
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