गोंडा। कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के भतीजे सुमित भूषण सिंह के साथ जमीन घोटाले में आरोपी सदानंद ने हाईकोर्ट में एफआईआर निरस्त करने की याचिका दायर की थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। शहर के सिविल लाइंस इलाके में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नजूल की भूमि खरीदने और कब्जा कर प्लाटिंग करने के मामले में सांसद के भतीजे सुमित भूषण के साथ सदानंद समेत आठ अन्य लोगों पर नगर कोतवाली में केस दर्ज है। एफआईआर को रद्द कराने के लिए सदानंद ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में सदानंद ने अर्जी लगाकर दावा किया था कि उसे वर्ष 1944 में यह जमीन पट्टे में मिली थी। जमीन के संबंध में उसने दीवानी न्यायालय में एक वाद दायर कर रखा है। जबकि उप्र सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सतीश चंद्र कशिश ने कहा कि सदानंद का स्थाई निषेधाज्ञा का वाद खारिज हो चुका है। मामले में सह अभियुक्त क्रेता कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के भतीजे सुमित भूषण की याचिका भी 17 फरवरी को निरस्त हो चुकी है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। याची सदानंद की ओर से अधिवक्ता अंग्रेज नाथ शुक्ल ने बहस की, जबकि उप्र सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सतीश चंद्र कशिश ने याचिका खारिज किये जाने की दलील दी। सुनवाई के दौरान गोंडा कोतवाली नगर के मुकदमा अपराध संख्या 112- 2023 को रद्द किये जाने पर जोर देते हुए याची के अधिवक्ता ने कहा कि गोंडा नगर पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से सदानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
गुरुवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस रॉय और जस्टिस जौहरी की बेंच ने सदानंद के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद न करते हुए याचिका खारिज कर दी। बेंच ने सदानंद को अग्रिम जमानत के लिए निचली अदालत में जाने को कहा।
कब्जा बेदखली पर नहीं पेश किया था कोई दावा
सिविल लाइंस में तीन एकड़ भूमि पर बाउंड्री बनाकर कब्जे पर प्रशासन की कार्रवाई के समय किसी ने जमीन पर दावा पेश नहीं किया था। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराई तो कैसरगंज सांसद के भतीजे सुमित भूषण सिंह का नाम प्रकाश में आया।
प्रशासन ने बिना किसी के अधिकार के आठ लोगों से बैनामा लिए जाने और नजूल भूमि पर कब्जा करने का केस दर्ज कराया। चार फरवरी नगर कोतवाली में नजूल निरीक्षक रघुनाथ तिवारी ने सुमित भूषण सिंह के साथ ही जमीन का बैनामा करने वाले सदानंद समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
नगर पालिका के रिकार्ड में दर्ज है सरकारी जमीन
सिविल लाइंस में जिस जमीन पर सुमित भूषण पर कब्जा करने का आरोप है, वह नगर पालिका के रजिस्टर नंबर- 45 में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। पट्टेदार का कहीं कोई जिक्र नहीं है। जबकि सुमित के अधिवक्ता ने याचिका पर सुनवाई के दौरान दावा किया कि 1370 फसली (वर्ष 1963) के लिए खतौनी राजस्व रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम है। 1940 में ही पट्टा उनके पक्ष में निष्पादित हो चुका था।