फोटो-5-गोंडा में ड्रोन से ली गई एल्गिन-चरसड़ी तटबंध की तस्वीर। -संवाद
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करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा (सरयू) के घटते बढ़ते जलस्तर और तेजी से हो रही कटान ने बांध के आसपास बसे गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। सरयू के लगातार बढ़ते जलस्तर से तथा बांध के किनारे तेजी से हो रही कटान लोगों के चिंता का कारण बन चुकी है। बाढ़ खंड के अधिकारियों द्वारा महज खानापूर्ति के चलते कई स्थानों पर सरयू बांध के किनारे सटकर बहने लगी है, और नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव यदि ऐसे ही बना रहा तो बांध के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती हैं। बांध पर कहने को अधिकारियों की निगरानी चल रही है, लेकिन दूर-दूर तक कोई भी अधिकारी नजर नहीं आता है।
दो दिनों से सरयू के घटते जलस्तर में सैकड़ों बीघे जमीन को काटकर नदी ने धारा में समाहित कर लिया। बांध और नदी के बीच परवल, गन्ना, धान, मक्का एवं अन्य सब्जियों लगे खेत लगातार कट रहे हैं। ग्राम पारा, बेहटा, परसावल, नकहरा, रायपुर मांझा, काशीपुर, बांसगांव एवं चंदापुर किटौली गांव के समीप सरयू नदी बांध से काफी दूरी पर थी। जहां चंदापुर किटौली, नकहरा, रायपुर, काशीपुर के सामने नदी बांध के किनारे पहुंच चुकी है और जलस्तर में बढ़ोतरी और गिरावट होने पर कटान का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारी सिर्फ बांधों पर निरीक्षण के दौरान उपस्थित दिखते हैं बाकी उनका पता नहीं रहता है। बृहस्पतिवार को सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से सुबह आठ बजे 27 सेंटीमीटर नीचे था वहीं दोपहर बाद तीन सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई।
सरयू में डिस्चार्ज भी बढ़ा है। बृहस्पतिवार को तीन लाख तीन हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज गुरुवार को दर्ज किया गया। नदी में जलस्तर की बढोत्तरी एक बार फिर शुरू हो गई है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान तक पहुंचने की आशंका बन गई है। उधर बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह एवं अवर अभियंता रवि वर्मा का कहना है कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है। बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। लगातार निगरानी कराई जा रही है। (संवाद)