गोंडा। किशोरी से दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज व पाॅक्सो एक्ट के मामले में न्यायालय में दाखिल अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने आरोपी को विचारण के लिए तलब किया है। अदालत ने चार साल बाद न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के मामले में दोषी तीन विवेचकों व संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
करनैलगंज थाना क्षेत्र की निवासी एक महिला ने 25 सितंबर 2018 को कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वह मजदूरी करने बाहर गई थी तो आरोपी ने उसकी 13 साल की बेटी को अकेली पाकर ने दुष्कर्म किया। आरोपी की धमकी से सहमी बेटी ने यह बात नहीं बताई। पीड़िता में जब गर्भधारण के लक्षण दिखे तो पता चला। आरोपी ने अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी और उसका छप्पर भी तोड़कर नष्ट कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना के दौरान वादिनी व पीड़िता का बयान दर्ज किया।
जिला चिकित्सालय में परीक्षण के दौरान पीड़िता का गर्भवती होना भी पाया गया। इसी बीच आरोपी श्याम अनुज उर्फ प्रदीप पांडेय की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में 25 अक्तूबर 2018 को पीड़िता के गर्भ में पल रहे बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश हुआ। हाईकोर्ट ने आरोपी अभियुक्त की गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई। तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक अजीत प्रताप सिंह ने डीएनए परीक्षण के लिए अभियुक्त प्रदीप का ब्लड सैंपल नहीं लिया। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी ने 16 जनवरी 2019 को डीएनए परीक्षण के लिए अभियुक्त की गिरफ्तारी व विवेचना निरीक्षक अशोक कुमार सिंह को अंतरित कर दी। मगर अशोक व उनके स्थानांतरण पर विवेचक बने प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने भी पीड़िता, उसके बच्चे व अभियुक्त का ब्लड सैंपल नहीं लिया। जबकि पीड़िता ब्लड सैंपल लेने के लिए लगातार उच्चाधिकारियों से गुहार लगाती रही। इस बीच जन्म के कुछ माह बाद बच्चे की मौत भी हो गई।
इसके बाद आठ जून 2019 को विवेचक राजेश कुमार सिंह ने क्षेत्राधिकारी करनैलगंज के कार्यालय में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इस पर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी ने उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी तो विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट का समर्थन करते हुए सात नवंबर 2019 को आख्या भेज दी। बाद में प्रभारी निरीक्षक केके राणा ने भी अंतिम रिपोर्ट का समर्थन करते हुए चार फरवरी 2020 को अपनी आख्या भेज दी।
आठ जून 2019 की अंतिम रिपोर्ट को चार साल के बाद 14 जुलाई 2023 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। क्षेत्राधिकारी ने भी विलंब का कारण स्पष्ट नहीं किया। अभिलेखों के परिशीलन के दौरान पाॅक्सो न्यायालय ने माना कि मामले में न तो समयक विवेचना की गई और न ही उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पीड़िता के बच्चे का डीएनए परीक्षण कराया गया। पुलिस ने गिरफ्तारी न करके अभियुक्त को अनुचित लाभ दिया। परिणामस्वरूप पीड़िता और उसकी मां को अपना गांव, घर छोड़ना पड़ा।
सुनवाई के दौरान मामले के तथ्य, पर्याप्त साक्ष्य व अपराध की गंभीरता देखते हुए विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट मोहम्मद नियाज अहमद अंसारी ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त करके आरोपी अभियुक्त प्रदीप पांडेय को जरिए सम्मन विचारण के लिए तलब किया है। मामले में सुनवाई के लिए अग्रिम तिथि 12 अक्तूबर 2023 को निश्चित की गई है। न्यायालय ने इस प्रकरण में तीनों विवेचकों व संबंधित पुलिस अधिकारी की भूमिका की विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक, डीआईजी, आईजी गोरखपुर, पुलिस महानिदेशक व प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजा है।