गोंडा। सीबीआई की विशेष अदालत ने बीते बुधवार को कांग्रेस के पूर्व सांसद और प्रदेश के पूर्व कारागार राज्य मंत्री विनय कुमार पांडेय उर्फ विन्नू पांडेय व उनके निजी सहायक अरविंद तिवारी उर्फ अरविंद कुमार को यात्रा भत्ते में फर्जीवाड़ा, भ्रष्टाचार और घोटाले का दोषी ठहराया है। 23 जनवरी की दोपहर 2.15 बजे अदालत उन्हें सजा सुनाएगी। आरोप है कि उन्होंने लोकसभा सदस्य रहते साल 2012 में फर्जी ई-टिकट और फर्जी बोर्डिंग पास से यात्रा दिखाकर नौ लाख 71 हजार 384 रुपये का भुगतान ले लिया।
सांसद को अकेले, पति-पत्नी, विभिन्न सहयोगियों व रिश्तेदारों के साथ प्रति वर्ष 34 हवाई यात्रा की सुविधा मिलती है। इस सुविधा का लाभ उठाते हुए श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे विनय कुमार पांडेय ने एक नवंबर से तीन नवंबर 2012 तक सात फर्जी ई-टिकट व बोर्डिंग पास के जरिए दिल्ली से चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर और पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली की हवाई यात्रा दिखाते हुए प्रतिपूर्ति के भुगतान के लिए लोकसभा सचिवालय में नौ लाख 71 हजार 384 रुपये का बिल प्रस्तुत कराकर भुगतान करा लिया।
सचिवालय के अधिकारियों ने एयर इंडिया को भेजकर सत्यापन कराया तो सभी टिकट फर्जी पाए गए। मामला सीबीआई के सुपुर्द किया गया। सीबीआई ने 21 मार्च 2016 को जालसाजी, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के दौरान पुख्ता साक्ष्य मिलने पर 24 दिसंबर 2016 को पूर्व सांसद विनय कुमार पांडेय और उनके निजी सहायक अरविंद कुमार उर्फ अरविंद तिवारी निवासी पुरैनिया बनगाई गोंडा के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
अदालत में खारिज हुई दलील
विनय पांडेय ने अपनी सफाई में कहा कि वह उच्च शिक्षित हैं और पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ लोकसभा की कई कमेटियों के सदस्य भी हैं। जिम्मेदारी अधिक होने से वह अपने कर्मचारियों पर निर्भर हैं। उनके आने जाने, मीटिंग और वित्तीय मामलों की देखभाल कर्मचारी करते हैं। किसी कर्मचारी ने द्वेषवश उन्हें फंसाकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया है।
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने विनय पांडेय की यह दलील खारिज कर दी। यात्रा भत्ता प्रतिपूर्ति के रूप में उन्हें कोई अवैध लाभ नहीं मिला है। अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच में कई खामियां भी हैं। गंभीरता से इसकी जांच होती तो एयर इंडिया, सचिवालय के अधिकारियों की भूमिका सामने आती और कई अधिकारी दोषी पाए जाते।