बलरामपुर। नए साल में जिले के 373 गांवों में पहली बार बिजली पहुंचेगी। यहां के लोग आज भी ढिबरी और लालटेन से काम चला रहे हैं। 500 से कम आबादी वाले इन गांवों में बिजली के लिए कई सालों से मांग हो रही थी। इन गांवों के विद्युतीकरण की तैयारी पावर काॅरपोरेशन ने शुरू की है। बिजली पहुंचाने के लिए 391 ट्रांसफार्मर और 9478 पोल लगाए जाएंगे।
जिले के सभी नौ विकासखंडों के छूटे मजरों में फेज तीन के तहत विद्युतीकरण की कार्ययोजना की स्वीकृति मिली है। इसके तहत सदर तहसील में 87, उतरौला तहसील में 152 व तुलसीपुर तहसील में 134 गांवाें में विद्युतीकरण होगा। इसमें 63 किलोवाट के 19 व 25 किलोवाट के 372 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे।
सभी गांवों में बिजली के तार पहुंचाने के लिए 9478 पोल लगाए जाएंगे। हरैया सतघरवा, गैंसड़ी, पचपेड़वा, 500 से कम आबादी वाले मजरों में श्रीदत्तगंज, उतरौला, रेहरा बाजार व विद्युतीकरण होगा। इससे करीब दो लाख की आबादी को बिजली मिल सकेगी।
दो चरणाें में पांच हजार गांवों का हो चुका है विद्युतीकरण
सौभाग्य योजना के पहले चरण में 3011 गांवों में विद्युतीकरण हुआ। विकास खंड सदर, तुलसीपुर तहसील के पांच लाख से अधिक लोगों को बिजली नसीब हुई थी। दूसरे चरण में 1435 गांवों को रोशन किया गया था। इन गांवों में चार हजार 615 बिजली के पोल लगाए गए थे। इसमें 15 हजार 157 घरों में बिजली के कनेक्शन दिए गए थे। मजरों को रोशन करने के लिए तीन 63 किलोवाट व 25 किलोवाट के 208 ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। इसमें तीन लाख से अधिक लोगों को बिजली का लाभ मिला था।
अभी ढिबरी और लालटेन से काम चल रहे हैं लोग
श्रीदत्तगंज के फत्तेपुर ग्राम सभा के वजीरगंज व हैदरगढ़ में अभी भी लोग ढिबरी और लालटेन से उजाला पाते हैं। मिट्टी का तेल न मिलने पर लोग डीजल से लालटेन से जलाते हैं। ज्यादातर लोग मोमबत्ती का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव के राम चरित्र यादव का कहना है कि बिजली न होने से काफी परेशानी होती है। मिट्टी का तेल भी अब नहीं मिलता। राम सजीवन यादव कहते हैं कि गैस से उजाले का प्रबंध किया जाता है। बच्चों की पढ़ाई आदि में परेशानी होती है। गांव के सीताराम वर्मा ने सोलर लाइट की व्यवस्था की है। इसी तरह अन्य गांवों का भी हाल है। प्रभारी अधीक्षण अभियंता बालकृष्ण के अनुसार, जिन गांवों में बिजली नहीं लगी है, उनके विद्युतीकरण का कार्य जल्द ही शुरू होगा। इसके लिए शासन से योजना को स्वीकृति मिली है।