गोंडा। निकाय चुनाव में वार्डों के आरक्षण की तस्वीर भले ही शासन के फैसले के बाद साफ होगी, लेकिन जिले से प्रस्ताव भेज दिया गया है। जिला प्रशासन ने चारों तहसीलों के एसडीएम के साथ सोमवार देररात तक आरक्षण के प्रस्ताव को प्रस्तावित कर दिया है। माना जा रहा है कि जिले से भेजे गए प्रस्तावों को शासन से स्वीकृति मिलेगी। जिसकी सूची मिलने पर जन सामान्य से आपत्तियां ली जाएंगी। आपत्तियों को निपटाने के बाद फिर से आरक्षण की सूची स्थानीय निकाय भेजी जाएगी। उसके बाद अंतिम रूप से स्वीकृति सूची के आधार पर निकाय चुनाव होंगे। नगर मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्ता का कहना है प्रस्तावित सूची प्रकाशित नहीं की जा सकती है। शासन से सूची वापस मिलने पर ही जारी की जाएगी।
जिले के 10 निकायों के चुनाव की तैयारियां तेजी से पूरी की जा रहीं हैं। 18 नवंबर तक मतदाता सूची अंतिम रूप से तैयार हो जाएगी। साथ ही वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके लिए 173 वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन के तय मानक के अनुसार उम्मीद है कि अनुसूचित वर्ग के 36 वार्ड होंगे, जिसमें 12 सीटें अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित हो सकती हैं। इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 47 वार्ड आरक्षित होने की उम्मीद है, जिसमें अन्य पिछडे़ वर्ग की महिलाओं के लिए 15 वार्ड तय किए जा सकते हैं। महिलाओं के 30 वार्ड और सामान्य वार्ड 60 हो सकते हैं। इस तरह आरक्षण के तय हुए तो सभी वर्ग की महिलाओं के लिए 57 वार्ड आरक्षित हो सकेंगे। माना जा रहा है कि शासन की ओर से निर्णय 12 नवंबर तक लिया जा सकता है। जिसके बाद सूची जारी कर आपत्तियां ली जाएंगी, और उसी के आधार पर फिर से वार्ड आरक्षण का प्रस्ताव निदेशालय से स्वीकृति कराया जाएगा। इसके बाद ही वार्डों के आरक्षण की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। शासन से ही निकायों के अध्यक्ष पदों का आरक्षण जारी किया जाएगा।
महिलाओं के आरक्षण में था असमंजस
वार्डों के आरक्षण में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण की स्थिति तय करने पर असमंजस की स्थिति थी। इसमें पहले से महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों को फिर आरक्षित रखा जा सकता है या नहीं। इसे लेकर अधिकारियों में भ्रम की स्थिति थी। शासन ने इस पर स्थिति साफ किया। तय किया कि महिलाओं के आरक्षित रहे वार्डों को यदि फिर से आरक्षित किया जा रहा है तो कोई दिक्कत नहीं है।
चार नए निकायों में नए सिरे से तय हुआ आरक्षण
जिले में चार नई नगर पंचायतें भी इस बार गठित हुईं हैं। जिसमें उनका आरक्षण नए सिरे से तय होना था। इसके अलावा दो का सीमा विस्तार हुआ है और चार निकायों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। बिना परिवर्तन वाले निकायों में चक्रानुक्रम आरक्षण की नीति से वार्डों का आरक्षण प्रस्तावित हुआ है। इससे माथापच्ची भी अधिकारियों को अधिक करनी पड़ी।
निकाय चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण का अभी प्रस्ताव तैयार हुआ है। जिसको स्वीकृति के बाद ही जनसामान्य के लिए प्रकाशित किया जाना है। उन पर आपत्तियों के निस्तारण का अंतिम रूप दिया जाएगा। समय से प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अर्पित गुप्ता, नगर मजिस्ट्रेट