गोंडा। वित्तीय वर्ष 2022-23 के खत्म होने में तीन दिन बचे हैं। आखिरी समय में जिला योजना से 43 विभागों के 451 करोड़ के बजट का अनुमोदन मंगलवार को होगा। जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को जिला योजना समिति के प्रभारी, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर सालभर के बजट को मंजूरी देंगे। ऐसे में बजट के आवंटन और उपभोग पर सवाल खड़ा हो गया है।
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बजट के आवंटन पर असर नहीं पड़ा है, खर्च भी हुआ है। इसके बाद अनुमोदन की जरूरत पर चौंकाने वाला है। जनता को सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसाल योजना बनाई जाती है। इसके बाद बजट की मांग अधिकारी करते हैं। लेकिन, यहां विकास के लिए बनाई गई उम्मीदों की योजना पूरे वित्तीय वर्ष मंजूरी का इंतजार करती रही। यह अलग बात है कि तय बजट विभागों को मिलता रहा और व्यय ही हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि उन लोगों ने पहले की कार्य योजना तैयार कर ली थी। शासन को भेज भी दी गई थी और स्वीकृति हो गई। शासन से प्रभारी मंत्री की नियुक्ति समय देर से हो पाई। जिससे बैठक ही नहीं सकी। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पहले बजट का अनुमोदन जरुरी है, इसलिए प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
जिला योजना के बजट से होते हैं ये कार्य
- किसानों को बीज खरीद पर अनुदान का वितरण, गन्ना नर्सरी उत्पादन पर अनुदान, लघु एवं सीमांत कृषकों को आर्थिक सहायता, किसानों के खेतों में नि:शुल्क बोरिंग की स्थापना, पशुओं का टीकाकरण, पौधारोपण, स्वयं सहायता समूहों का गठन व अनुदान वितरण, मनरेगा के तहत रोजगार सृजन, शौचालय निर्माण, सोलर लाइट की स्थापना, सड़क, नाली निर्माण, पुल निर्माण, खेलकूद गतिविधियां, हैंडपंप की स्थापना, छात्रवृत्ति वितरण समेत अन्य कार्य होते हैं।
आवंटन व खर्च नहीं हुए प्रभावित
नियमों के तहत जिला योजना समिति के अध्यक्ष प्रदेश सरकार के मंत्री ही होते हैं। प्रभारी मंत्री तय होने के बाद समय मिलने पर बैठक की कार्रवाई की जा रही है। बजट के आवंटन और खर्च प्रभावित नहीं हुए हैं।
- अरुण कुमार सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी