इटियाथोक (गोंडा)। चतुर्भुजी मंदिर पारासराय में चल रहे रुद्र महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में अंजलि किशोरी ने कहा, भगवान राम मर्यादा स्थापित करने के लिए मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं, लेकिन वह मना कर देते हैं। केवट पहले पैर पखारने की बात कहते हैं। वह भगवान के पैर धोए बिना नाव में बैठाने को तैयार नहीं हुए। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो गए। कथा में डॉ. करुणा पति त्रिपाठी, ओम कुमार शुक्ल, संजय त्रिपाठी, धीरेंद्र मिश्र, ओपी शुक्ल, संजय तिवारी, रघुनंदन तिवारी, अभिमन्यु शुक्ल मौजूद रहे। (संवाद)
केले के रेशे से उत्पाद तैयार करतीं खुशबू प्रेरणा समूह की महिलाएं। स्रोत समूह- फोटो : जिला जेल चौराहे पर कालिंद्री एक्सप्रेस के इंजन से सांड टकराने के बाद लगे जाम के पास खड़े अन्ना गोवंश।