विश्नोहरपुर (गोंडा)। महंगूपुर गांव में कपिल मुनि आश्रम में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार को प्रवाचक ने राम विवाह व वन गमन का प्रसंग सुनाया।
आचार्य अवधेंद्र प्रपन्नाचार्य ने कहा, राजा जनक ने सीता के स्वयंवर के लिए अनोखी शर्त रखी। जो शिव जी के धनुष पिनाक की प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में आए सभी राजाओं ने प्रयास किया किंतु वह धनुष हिला तक न सके। तब श्रीराम ने धनुष उठाया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। सीता ने श्रीराम को वर रूप में चुना। वहीं पर लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न का विवाह भी संपन्न हुआ। आचार्य ने कहा, आज कल लोग विवाह को समझौते की तरह कर रहे हैं, जो आगे चलकर दुखों का कारण बनता है। सनातन धर्म में विवाह वैदिक रीति से होना चाहिए। श्रीराम के विवाह के बाद अब उनके अवतरण के मुख्य उद्देश्यों की पूर्ति का समय आ गया। नियति के फलस्वरूप मंथरा के उकसाने पर कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। जिसमें श्रीराम को वनवास व भरत को राजगद्दी दिए जाने की बात कही। पिता की आज्ञा मानकर श्रीराम ने वन गमन स्वीकार किया। वह लक्ष्मण व सीता के साथ वन को चले गए। वन गमन की मार्मिक कथा सुन श्रद्धालु रो पड़े। आरती व प्रसाद वितरण के बाद कथा का विश्राम हुआ। इस मौके पर क्षितिज चंद्र मिश्र, अरुणेश पांडेय, नरसिंह मिश्र, डाॅ. रमेश पांडेय, देवेंद्र पांडेय, जगन्नाथ शास्त्री आदि मौजूद रहे। (संवाद)
खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद