गोंडा। रोकथाम के प्रभावी इंतजाम न होने से जिले में डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके चलते ही एक सप्ताह में ही डेंगू के मरीजों का आंकड़ा दो गुना तक पहुंच गया है। बाढ़ व बारिश के बाद हमलावर हुए मच्छरों से बचाने को संबंधित विभाग के जिम्मेदार पूरी तरह उदासीन बने हैं। बदहाल साफ सफाई से लेकर लार्वा रोधी दवा का छिड़काव न होने से मच्छर जनित बीमारियों से पीड़ितों की संख्या भी अस्पतालों की ओपीडी में लगातार बढ़ रही है। जिम्मेदारी से बचने के लिए बस डेंगू पॉजटिव मरीज के घर के आसपास चूना छिड़काव की खानापूर्ति ही हो रही है।
पिछले साल डेंगू ने 130 लोगों को अपना शिकार बनाया था, इसमें से चार को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। बाढ़ के कहर से जूझ रह लोगों को अब बाढ़ का पानी उतरने पर मच्छरों से फैलने वाली डंगू व वायरल बुखार से जूझना पड़ रहा है। निरोधात्मक कार्रवाई न होने से एक सप्ताह में ही डेंगू के केसों की संख्या 11 से बढ़कर 22 हो गई है।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अभी तक नगर पालिका, नगर पंचायत व ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर फागिंग व छिड़काव का कोई शेड्यूल तक नहीं बना पाया है। बस खानापूर्ति को डेंगू प्रभावित मरीज के घर के आसपास चूने का छिड़काव कर रोकथाम पूरी मान ली जाती है। जिले में संचारी नियंत्रण अभियान चलने के बावजूद भी डेंगू से प्रभावित मरीजों की उचित जांच व इलाज तक की व्यवस्था सीएचसी व पीएचसी तक में नहीं है। इस कारण बुखार पीड़ितों को डेंगू की जांच के लिए निजी अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ रहा है।
मलेरिया विभाग के निरीक्षकों की माने तो हर वर्ष सितंबर से लेकर दिसंबर महीने तक डेंगू के तेेजी से फैलने की आशंका सर्वाधिक होती है। डेंगू का मच्छर अधिक गर्मी और अधिक सर्दी में नहीं पनपता। चिकित्सकों के अनुसार डेंगू पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार के साथ अचानक सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों के साथ आंखों के पीछे दर्द होता है। साथ ही उल्टी व जी मिचलाने की परेशानी के साथ ही पीड़ित के शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे चकत्ते नजर आते हैं। इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करने के साथ ही घर में कही भी पानी का भराव न होने देने व पूरी शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना ही बेहतर उपाय है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एसजेडए जैदी ने बताया कि मच्छरों के प्रकोप से छुटकारा दिलाने के लिए छिड़काव व फागिंग करने के लिए नगर पालिका, नगर पंचायतों व ग्राम पंचायतों को जिलाधिकारी की ओर से पहले ही निर्देशित किया जा चुका है। मलेरिया विभाग की ओर से भी बुखार पीड़ित मरीजों की स्लाइड बनवाने से लेकर लार्वा रोधी के साथ ही फागिंग व अन्य निरोधात्मक कार्रवाई भी कराई जा रही है।