धानेपुर थाना क्षेत्र के सुकरौलिया गांव मे पुलिस पिटाई के चलते गुरुवार की रात मौत के मुंह मे समाये दलित राम बचन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मृतका की पत्नी अपने पति के शव को देखकर बिलख उठती है और देखते ही देखते बेहोश हो जाती है। परिजन उसे किसी तरह संभालकर किनारे करते हैं, लेकिन होश मे आने पर वह फिर से अपने पति के शव से लिपट जाती है।
शुक्रवार की सुबह यह करुण क्रंदन देखकर हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। थाना क्षेत्र के सुकरौलिया गांव निवासी दलित राम बचन की तीन बेटियां प्रमिला (12), निर्मला (9) वर्षीया, उर्मिला (6) व दो बेटे पवन (5) व शिवा (2) हैं।
गरीब परिवार होने के कारण राम बचन अपनी पत्नी केवला देवी के साथ मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। खेती के नाम पर उसने पड़ोस के रेहारी गांव में उसने एक बीघा जमीन ले रखी थी, जिसकी देखरेख के लिए वह बुधवार की शाम को वहां गया था। शायद तब उसे यह आभास नहीं था कि पुलिस उसके साथ जुल्म की इंतहा कर देगी।
खेत से वापस लौटते समय रास्ते में धानेपुर थाने के दरोगा रवींद्र यादव, सिपाही राजरोशन कनौजिया व राम मिलन यादव ने उसे कच्ची शराब का करोबारी बताकर रोक लिया और पैसे की मांग करने लगे।
जब उसने शराब का करोबार करने की बात से मना किया तो दरोगा व पुलिस वाले उसपर टूट पड़े और उस गरीब पर जमकर लाठियां बरसाईं। इसके बाद उसके जेब मे रखा 15 सौ रुपया भी छीन लिया।
किसी तरह वह घर पहुंचा और परिजनों को अपने साथ हुई पुलिसिया ज्यादती की बात बताई। परिवारीजनों ने उसका इलाज बाजार के ही एक चिकित्सक के यहां कराया, लेकिन गुरुवार की देर रात राम बचन की मौत हो गई। पति की मौत के बाद केवला देवी पर अकेले ही पांचों बच्चों का भार आ गया है।
प्रशासन की तरफ से उपजिलाधिकारी ने परिवार को कृषि पट्टा देने व 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का वादा किया है, लेकिन क्या इस मदद से पीड़ित परिवार का भरण पोषण हो सकेगा, यह सवाल लोगों को बेचैन कर रहा है।
मृतक की पत्नी भी इनके पालन पोषण और इनकी पढ़ाई की चिंता में अचेत हो जाती है। बच्चे भी अपने पिता के शव को देखकर बिलख उठते हैं। इनका करुण क्रंदन देख मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो जाती हैं।