एक दिव्यांग युवक ने गौरा बुजुर्ग जाने वाली रोड पर दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। दो घंटे तक बीच सड़क पर लेटे युवक को बाद में जैसे-तैसे पुलिस कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। तब जाकर कहीं गौराबुजुर्ग जाने वाली रोड का जाम खुल सका।
युवक का आरोप है कि जिस डाक्टर के इलाज से वह अपाहिज हुआ, उसके खिलाफ तीन साल बाद अदालत के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन मामले को दबाने के लिए पुलिस ने इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
खोड़ारे थानाक्षेत्र की नैमुन्निशा की माने तो उनके पति तौफीक अहमद पेश से बस ड्राइवर थे। यहीं एक पब्लिक स्कूल की बस चलाते थे। एक दिन उन्हें तेज बुखार आया। दवा लेने वह डाक्टर अजय के नर्सिंग होम गए थे।
यहां डाक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उनके पति के दोनों पैरों व हाथ ने काम करना ही बंद कर दिया। वह अपने पति को कहीं और ले जाती, लेकिन डाक्टर अजय ने 10 घंटे तक उन्हें कहीं ले जाने नहीं दिया। 10 घंटे बाद जब वह अपने पति को सादुल्लाहनगर के एक डाक्टर के यहां ले गई तो पता चला कि इंजेक्शन के असर से उसके पति के हाथ-पाव बेकार हो गए हैं। अगर वह उसे पहले ले आती तो वह कुछ कर सकते थे। इसके बाद वह अपने पति को लखनऊ पीजीआई भी ले गई। लेकिन कहीं से भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ।
लौटकर गांव आने के बाद उसने डाक्टर के गलत इलाज का जिक्र करते हुए अधिकारियों की चौखट भी छानी, लेकिन कहीं से उसे न्याय नहीं मिला। वर्ष 2016 में जब उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो अदालत के आदेश पर जुलाई 2016 में पुलिस ने उनकी रिपोर्ट तो लिखी, लेकिन बाद में मामले को दबाने के लिए उसी पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मायूस होकर शुक्रवार को उनका पति तौफीक जैसे-तैसे गौराबुजुर्ग जाने वाली रोड तक पहुंचा और वहां सड़क के बीचोबीच लेटकर रोड जाम कर दी।
तौफीक ने पुलिस-प्रशासन के मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए मामले में दोषी सभी लोगों के खिलाफ नारेबाजी की। इस मामले की सूचना पुलिस को मिली तो वह भी भागकर मौके पर पहुंची। जहां दोनों पैरों से विकलांग हो चुके युवक को समझाने का प्रयास भी खूब हुआ। लेकिन वह दो घंटों तक किसी की नहीं माना। बाद में दरोगा सत्यनारायण यादव के समझाने और मामले में कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद वह युवक शांत हुआ। तब जाकर कहंीं रोड पर लगा जाम खुल पाया।