ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग से प्राप्त अनुदान का दुरुपयोग करने वाली तीन संस्थाओं के संचालकों के विरुद्ध करीब 24 लाख रुपये के गबन का केस बलरामपुर देहात थाने में दर्ज किया गया है। विभाग के लिपिक की तहरीर पर संस्था के पांच कार्यकर्ता नामजद किये गए हैं।
बलरामपुर देहात थानाध्यक्ष नरेन्द्र यादव ने गुरुवार शाम बताया कि गत वर्ष स्वरोजगार के लिए डीआरडीए विभाग ने अखंड ज्योति जन कल्याण सेवा समिति, सहयोग सेवा संस्थान बलरामपुर तथा बुद्धा युनिवर्सल डेवलेपमेंट संस्थान इंदिरा नगर लखनऊ को करीब 24 लाख रुपये अनुदान दिया था।
इन संस्थाओं को इस अनुदान से जिले में बकरी पालन, भैंस पालन व सीमेंट की ईंट बनाने की इकाई लगाकर बेरोजगारों को रोजगार तथा प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था।
संस्थाओं ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया। इस बात की डीएम द्वारा बनाई गई जांच कमेटी की जांच में पुष्टि हुई। इसी क्रम में गुरुवार को डीआरडीए के लिपिक महमूद आलम की तहरीर पर अखंड ज्योति जन कल्याण सेवा समिति के संचालक डॉ. अनुराग यादव व शिवपूजन यादव, सहयोग सेवा संस्थान के संचालक अरविंद व विजय शंकर तथा बुद्धा यूनिवर्सल डेवलेपमेंट समिति के संचालक पीतांबर के खिलाफ गबन का केस दर्ज किया गया है।
मामले के सारे दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच स्थानीय थाने में तथा गहन जांच ईओडब्लू द्वारा की जाएगी। इस संबंध में अखंड ज्योति जन कल्याण सेवा समिति के अनुराग यादव ने बताया कि अनुदान के अनुबंध की शर्तों में एफआईआर दर्ज कराने का प्राविधान ही नहीं है।
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में काम को पूरा कराए जाने अथवा धन की रिकवरी कराने की बात कही थी। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते स्थानीय जंतु उद्यान व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. एसपी यादव के इशारे पर यह केस दर्ज कराया गया है।
इस संबंध में राज्य मंत्री डॉ. एसपी यादव ने बताया कि उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप निराधार व झूठे है।