दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को कोर्ट ने सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अभियुक्त को 14 हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विनय कुमार सिंह व मोहम्मद शाहिद रजा के मुताबिक थाना तरबगंज क्षेत्र के दूबे पुरवा गांव के रहने वाले रामधीरज दूबे ने 9 जून 2008 को कोतवाली नगर में मनोज कुमार तिवारी निवासी गोड़वाघाट के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने, दहेज प्रताड़ना व दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा गया कि रामधीरज की बेटी पुनीता की शादी छह साल पूर्व मनोज कुमार तिवारी उर्फ पप्पू के साथ हुई थी। इसके तीन साल बाद गौना में विदा होकर वह ससुराल गई। शादी में दान-दहेज भी दिया था। मगर शादी के कुछ दिनों बाद से ससुराल वाले दहेज में दो लाख रुपए व इंडिका कार की मांग करने लगे।
मांग पूरी न होने पर ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर पुनीता ने आत्महत्या कर ली। सत्र परीक्षण के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ताओं ने अदालत पर गवाहों का बयान कराया। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय आरपी सिंह ने गवाहों के बयान को सुना।
पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अभियुक्त मनोज कुमार तिवारी उर्फ पप्पू को पुनीता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा व दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।