खनन माफियाओं के इशारे पर अफसरों देखकर किया अनदेखा
गोंडा। जिले में बालू के अवैध खनन का कारोबार बहुत पुराना है। जिले में करीब चार दशक से अवैध बालू खनन का धंधा चल रहा है। माफियाओं के इशारे पर प्रशासनिक व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने अवैध खनन की ओर से हमेशा आंखें बन्द रखी।
नतीजा यह हुआ कि बिना रायल्टी दिये ही बालू खनन माफियाओं ने जिले की सैकड़ों बीघा खेती वाली जमीन को खोखला कर बंजर व तालाब बना दिया। खनन माफियाओं ने तो जिले के इस कीमती खनिज से अपनी तिजोरी भरी ही।
जिले में सबसे बड़े बालू के अवैध खनन का मामला आज से 10 साल पहले उजागर हुआ था। जिले के तरबगंज तहसील के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थिति चकरसूल गांव के पास खनन माफियाओं की ओर से बालू लदे ट्रक को रेलवे लाइन पार करने के दौरान एक ट्रेन की टक्कर हो जाने से कई लोगों की मौत हो गई थी।
लेकिन इस मामले को माफियाओं ने अपने धनबल से मामले को बहुत उभरने नही दिया। आज के चार साल पहले जिले की तत्कालीन जिलाधिकारी डा. रोशन जैकब ने खनन स्थल पर छापेमारी की। इस मामले में उन्होंने क्षेत्र के हाफिज अली के खिलाफ अवैध खनन का मामला दर्ज कराया।
लेकिन उनके चले जाने के बाद उसने फिर खनन शुरू कर दिया। फिर तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने हाफिज अली व उसके तीन भाइयों खिलाफ अवैध खनन करने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के साथ उसके सम्पत्ति की कुर्की की। तब से उस स्थल पर अवैध खनन का काम पहले से कम हो रहा है।
लेकिन तरबगंज, कटरा बाजार,करनैलगंज समेत करीब दो दर्जन स्थान पर खनन माफियाओं ने कई खनन के प्वांइट बना डाले। यह सब काम पुलिस व क्षेत्रीय प्रशासनिक व राजस्व अधिकारियों की जानकारी में चलता रहा।
क्षेत्र के ग्रामीणों ने बालू की ढुलाई से उडने वाले धूल गुबार से तंग होने के साथ सड़कें धंसने के कारण परेशान होकर कई बार प्रदर्शन भी किया लेकिन अफसरों ने नजर अंदाज कर दिया। शिकायत पर बालू की ट्रकें व ट्रालियां पकड़कर माफियाओं की मिलीभगत से छोड़ दी गईं। इसकी वजह से खनन माफियाओं का हौसला बुलंद रहा।
चकरसूल में अवैध बालू खनन की एनजीटी में चल रही सुनवाई
गोंडा। सांसद कीर्तिवर्धन सिंह राजा भइया की ओर से जिले में बालू के अवैध खनन की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में की। नवाबगंज ब्लाक में चकरसूल गांव के पास जहां पर बालू का खनन हो रहा है उसी की थोड़ी दूरी पर रेलवे की लाइन भी गई है।
खनन माफिया ने तीन मीटर की गहराई के लिए मिले पट्टे की आड़ में उस स्थान पर करीब दो एकड़ में 50 फिट गहरा तालाब कर दिया है। पोकलैंड व दूसरी मशीन से खनन माफियाओं ने उस जमीन को न सिर्फ गहरा खंदक बना दिया बल्कि उसके आसपास का इलाका खोखला कर दिया है।
बताया जाता है कि शिकायत को एनजीटी ने गंभीरता से लेकर जब टीम गठित कर उसकी जांच करायी तो उसमें खनन माफिया व अधिकारियों के काले कारनामे उजागर हुए। न सिर्फ गलत ढंग से खनन कर उस जमीन को तालाब बना दिया गया बल्कि पर्यावरण को भी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया गया।
एक राजस्व विभाग के अधिकारी की माने तो जो खनन हुआ है उसकी भरपाई संभव नही है। यदि उसे फिर से भर भी दिया जाए तो पर्यावरण व स्वच्छता को नुकसान पहुंचा है व नाकाबिले माफी है। इस मामले में कई बार डीएम व एसपी को हलफनामा देने के साथ खुद पेश होकर रिपोर्ट देनी पड़ी है। एनजीटी मामले का अध्यन कर रही है।
कृषि फार्म के ढाई एकड़ जमीन में कर डाला खनन
गोंडा। खनन माफिया ने चकरसूल स्थिति कृषि विभाग के राजकीय कृषि फार्म को भी नही छोड़ा। खनन माफिया ने अफसरों के सह पर बालू का खनन करने कृषि फार्म के ढाई बीघे जमीन को तालाब बना दिया।
कृषि विभाग के अधिकारी पिछले एक दशक से अपनी जमीन के पैमाईश कराने को लेकर सम्बन्धित राजस्व विभाग के आला अफसरों को पत्र लिख जमीन अलग कराने की मांग करते रहे, लेकिन अवैध बालू खनन की मलाई काट रहे अधिकारियों ने कभी इसका ध्यान नही दिया। इस बावत जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह का कहना है कि कई साल से विभाग पैमाइश कराने की मांग कर रहा है। लेकिन पैमाइश की कार्रवाई नही हुई।
कार्रवाई के नाम पर किया खेल
गोंडा। एनजीटी की टीम ने जब खनन स्थल का निरीक्षण किया तो अधिकारियों ने कार्रवाई का बड़ा खेल किया। सरकारी सलाहकार अधिकारी की सलाह पर विभाग को उस इलाके की एक मृतक महिला के नाम से यह कह कर रिपोर्ट दर्ज करा दिया जिसकी कई साल पहले मौत हो चुकी है।
अधिकारियों ने खनन का जिम्मेदार महिला को यह कहकर ठहरा दिया कि उसके नाम उस जमीन का पट्टा था जिसपर खनन हुआ है। खैर अब सब पर एनजीटी का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।