33 पट्टाधारकों का 28 साल बाद पट्टा निरस्त
तालाब के भूमि की नियम विरूद्ध नवैयत बदले जाने पर सीआरओ ने की कार्रवाई
गोंडा। राजस्व मोहकमे में जमीन का गड़बड़झाला की परते बहुत गहरी हैं। मनकापुर तहसील में नियम को ताक पर रखकर आज के 28 साल पूर्व तालाब के भूमि की नवैयत को बदलकर करीब 16.98 एकड़ जमीन 33 लोगों को पट्टा दे देने का मामला सामने आया है। इसे मुख्य राजस्व अधिकारी अरूण कुमार शुक्ला ने जांच में हुए खुलासे के बाद सभी पट्टाधारकों के नाम पट्टे को खारिज कर दिया है। साथ ही एसडीएम मनकापुर को कब्जेदारों को बेदखकर कर जमीन को ग्राम पंचायत/भूमि प्रबन्धक समिति को देने का निर्देश दिया है।
मनकापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कहोबा स्थिति तालाब की 33.20 एकड़ भूमि में से करीब 16.98 एकड़ भूमि राजस्व संहिता के खिलाफ वर्ष 1989 में 33 लोगों पट्टा दे दिया गया। उस समय वहां के लेखपाल,राजस्व निरीक्षक व तहसीलदार की रिपोर्ट पर मनकापुर के पूर्व एसडीएम ने तालाब की भूमि की नवैयत बदलकर उसे नवीन परती दर्शाते हुए राजा राम,वंशराज सिंह,भीरा राम व मालिक राम सतेत 33 लोगों को कृषि हेतु पट्टा आवंटित कर दिया। इस मामले का बाद में जब लोगों को पता चला तो इसकी राजस्व विभाग के अधिकारियों के यहां शिकायत की गई। विभागीय अधिकारियों ने इसकी जांच करायी तो मामला खुलकर सामने आया। मनकापुर के एसडीएम ने जांच रिपोर्ट भेजी की नियम के खिलाफ तालाब की भूमि पर 33 लोगों को पट्टा दे दिया गया है जो निरस्त करने योग्य है। इस मामले में की सुनवाई कर रहे मुख्य राजस्व अधिकारी ने राजस्व संहिता के तहत माना कि तालाब की भूमि की नवैयत को बदलकर जमीन को पट्टे पर नही दिया जा सकता है। ऐसे में उक्त भूमि के पूर्व में किये गये पट्टा आवंटन को निरस्त किया जाता है। इस बाबत एसडीएम मनकापुर को निर्देशित किया कि उक्त भूमि को तालाब की के खाते में दर्ज करायी जाए। उक्त जमीन पर सभी कब्जेदारों को बेदखलकर ग्राम पंचायत को कब्जा दिलाया जाए।