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जांच के दायरे में 70 ग्राम पंचायतों के 3500 प्रधानमंत्री आवास

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70 गांव के 3500 प्रधानमंत्री आवास जांच के दायरे में
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पांच ब्लाकों में अपात्रों को आवास देने का हो चुका है खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। प्रधानमंत्री आवास में अपात्रों के चयन को लेकर हो रहे खुलासे के बाद इस पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक पांच ब्लाकों में करीब 150 आवास अपात्रों को आवंटित किए जाने का खुलासा हो चुका है। अपात्रों के चयन को लेकर किए जा रहे खेल के सामने आने के बाद जिले की 70 ग्राम पंचायतों के करीब 35 सौ प्रधानमंत्री आवास जांच के दायरे में आ गए हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने इन आवासों की जांच रिपोर्ट को फिर से सत्यापित कराने का निर्देश दिया है। सत्यापन की जिम्मेदारी जिला स्तरीय अफसरों की टीम को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिले को 11747 आवास किए जाने का लक्ष्य दिया गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर आवास के लिए लाभार्थियों का चयन करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की है। इसके बाद पात्रता की शर्तों पर खरा उतरने वाले लाभार्थी का चयन कर बीडीओ को लाभार्थी का प्रस्ताव जिले सतर पर अग्रसारित करना होता है लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसरों ने इस योजना में जमकर खेल किया। ग्राम प्रधान व सचिव के मनमाने चयन पर बीडीओ व अन्य अफसरों ने भी आंख मूंदकर अपनी रिपोर्ट लगा दी। नतीजा यह हुआ कि कई गांवों में अपात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ लेने में कामयाब हो गए। नवाबगंज के कल्यानपुर,झंझरी के गोंडा गिर्द,छपिया के केशवनगर ग्रंट, मुजेहना के जिगना, लखनीपुर, धरमेई व बनगाई में अब तक करीब 160 अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास देने के मामले का खुलासा हो चुका है। हलधरमऊ ब्लाक के सेल्हरी गांव में तो तीन मृतकों को आवास योजना का पात्र बताते हुए चयन कर लिया गया। इस खुलासे के बाद मुख्य विकास अधिकारी दिव्या मित्तल ने कड़ा रुख अपनाया है। सीडीओ की जांच में 70 ग्राम पंचायतों के 35 सौ प्रधानमंत्री आवास जांच के दायरे में आ गए हैं। सीडीओ ने जिला स्तरीय अफसरों की कमेटी बनाकर चयनित किए गए लाभार्थियों के सत्यापन का निर्देश दिया है।
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अब फोटो के साथ होगा लाभार्थियों का सत्यापन
परियोजना निदेशक वीरपाल ने बताया कि अब तक जांच करने वाले अधिकारी बिना लाभार्थी के घर गए प्रधान या अन्य स्थान पर बैठकर पात्र या अपात्र की सूची तैयार कर लेते थे। बिना मौके पर उन्हे सही तथ्य की जानकारी नही मिल रही थी जिससे जांच के बाद भी तमाम गउ़बडिय़ां सामने आई हैे। इस लिए इस प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अब सत्यापन करने वाले अफसरों को लाभार्थियों के घर जाकर जांच के बाद उनके आवास की फोटो भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

चार प्रधानों व सचिवों पर हो चुकी है एफआईआर
आवास आवंटन में हुए घपले को लेकर मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर चार ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। हलधरमऊ ब्लाक के सेल्हरी गांव में तीन मृतकों को पात्र बनाकर आवास के लिए चयनित कर लिया गया। जांच में इसका खुलासा होने पर सीडीओ के निर्देश पर यहां के ग्राम प्रधान,सचिव व रोजगार सेवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। गोंडा गिर्द में भी आवास आवंटन में घपले पर ग्राम प्रधान व सचिव के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई है। इसके पहले लोहिया आवास में हुए घोटाले में बेलसर ब्लाक के चिरेबसना व नबावगंज के सांसद आदर्श ग्राम लिदेहना ग्रंट गांव के ग्राम प्रधान के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है। इसमें लिदेहना ग्रंट के ग्राम प्रधान के वित्तीय प्रभार सीज कर तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
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जांच के दायरे में अफसरों की भूमिका
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपात्रों को आवास के लाभार्थी के रुप में चयनित करने के खुलासे ने आवास आवंटन की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसरों की भूमिका को शक के दायरे में ला दिया है। सत्यापन की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला समाज कल्याण अधिकारी, परियोजना निदेशक डूडा, जिला विद्यालय निरीक्षक, हलधरमऊ व झंझरी के एडीओ आईएसबी को सीडीओ ने कारण बताओं नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इन अफसरों पर बिना मौके पर गए ही सत्यापन रिपोर्ट लगाने का आरोप है।
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