तकरीबन साढ़े 5 लाख बिजली उपभोक्ताओं वाले देवीपाटन मंडल में पावर कॉर्पोरेशन के ऐसे करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता हैं, जिनपर कॉर्पोरेशन का 100-200 नहीं बल्कि पूरा-पूरा 600 करोड़ रुपया बकाया है।
इसमें शहरी क्षेत्र के 34 हजार उपभोक्ताओं पर जहां 291 करोड़ का बकाया है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र के 1.15 लाख उपबोक्ता 304 करोड़ रुपए के बकाएदार है। जिनसे इतनी भारी-भरकम रकम की वसूली कर पाना पावर कॉर्पोरेशन के इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
एक करोड़ आबादी वाले देवीपाटन मंडल में पावर कॉर्पोरेशन के वैसे तो कुल मिलाकर साढे पांच लाख के करीब बिजली उपभोक्ता हैं। लेकिन इन उपभोक्ताओं में एक बड़ी संख्या में 4 लाख उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जो समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान करते रहते हैं।
जिनसे हर महीने पावर कॉर्पोरेशन को 20 से 25 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता रहता है। जबकि बकाएदार उपभोक्ताओं की अगर बात करें तो 5 हजार रुपये से ऊपर की बकाएदारी में आने वाले मंडल के इन डेढ़ लाख उपभोक्ताओं पर जो 600 करोड़ की रकम पावर कॉर्पोरेशन की बकाया है, उसमें 180 करोड़ रुपया तो शुद्ध ब्याज का है।
जो हर महीने चक्रवृद्धि ब्याज की तरह उपभोक्ताओं के बिजली बिल में जुड़ता रहता है। पांच साल पहले तक मंडल के सभी चार जिलों में बिजली के बिलों का न तो ठीक तरह से वितरण हो पाता था न ही इसकी वसूली। जिसकी वजह से तमाम उपभोक्ता चाह कर भी अपने बिलों का भुगतान नहीं कर पाते थे।
लेकिन इधर पांच वर्षों में बिजली का नेटवर्क जिस तरह से मजबूत हुआ है, उससे बिजली बिलों के वितरण से लेकर इसकी वसूली की व्यवस्था लाख दर्जे ठीक हुई है। शहर में आनलाइन बिलिंग काफी पहले से ही चल रही थी। लेकिन अब तो ग्रामीण इलाकों में भी आनलाइन बिलिंग होने लगी है।
जिससे पावर कारपोरेशन के लिए वसूली का रास्ता काफी हद तक आसान हो गया है। बिजली मामलों के जानकारों की माने तो जिले में जो 600 करोड़ रुपए पावर कारपोरेशन का बकाया है, उसका अगर उपभोक्ताओं के स्तर से पूरा-पूरा भुगतान कर दिया जाता है, इससे पावर कारपोरेशन को तो फायदा होगा ही, साथ में जो देनदारी पावर कारपोरेशन की मौजूदा वक्त 600 करोड़ रुपए है, वह घटकर 420 करोड़ रुपए ही रह जाएगी। जबकि बाकी बचे 180 करोड़ रुपए का फायदा सीधे-सीधे उपभोक्ताओं को होगा। जिसकी शत-प्रतिशत वसूली पावर कारपोरेशन के इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं है।