बभनजोत में गर्भवती महिला की कर दी नसबंदी
गौराचौकी (गोंडा)। सीएचसी बभनजोत में एक गर्भवती महिला की नसबंदी कर दी गई। मामले का खुलासा 4 दिन पहले तब हुआ, जब महिला ने गर्भवती होने के शक में अपना अल्ट्रासाउंड कराया।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के मुताबिक महिला को डेढ़ महीने का गर्भ है। बावजूद इसके सीएचसी बभनजोत में लगे कैंप में उसकी नसबंदी कर दी गई।
मामला विकासखंड गौरा चौकी अन्तर्गत पड़ने वाली सीएचसी बभनजोत से जुड़ा है। इस सीएचसी में 18 दिन पहले 28 नवम्बर को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नसबंदी को लेकर एक कैंप लगाया गया था।
जिसमें बाकी महिलाओं की तरह मरैला गांव से आईं सुनीता देवी पत्नी रामविशुन की नसबंदी की गई थी। नसबंदी के 14 दिन बाद जब महिला को पेट में बच्चा होने का शक हुआ तो उसने अल्ट्रासाउंड कराया। जिसमें महिला 6 हफ्ते 4 दिन की गर्भवती पाई गई।
महिला के पति रामविशुन के मुताबिक नसबंदी कैंप में गोंडा से आई सर्जन डाक्टर ललिता ने उनकी पत्नी की नसबंदी की थी। जबकि नसबंदी से पहले उनकी पत्नी की कई जांचे भी कराई गई थी। लेकिन उनकी पत्नी पहले से गर्भवती है, यह बात उनकी पत्नी की जांच के दौरान नहीं बताई गई।
जिसे लेकर उसने पत्नी की लापरवाहीपूर्वक नसबंदी किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत सीएमओ व अपर निदेशक से की है। उधर सीएचसी बभनजोत में गर्भवती महिला की नसबंदी के बाबत यहां के अधीक्षक डॉ. जय प्रकाश का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी है। जिसे वह दिखवा रहे हैं कि इसमें गलती है। क्योंकि ज्यादातर मामलों में जिस किट से वह जांच कराते हैं, उसमें अर्ली प्रेग्नेंसी के कारण महिला के गर्भवती होने का पता कभी-कभी नहीं चल पाता।
गौरा चौकी इलाके में गर्भवती महिला की नसबंदी करने की शिकायत मिली। जिसे लेकर सीएचसी के अधीक्षक से पूरी आख्या मांगी गई है। आख्या मिलने के बाद वह जांच टीम गठित करके पूरे मामले की जांच कराएंगे।
लेकिन जहां तक उनका मानना तो ऐसे केसों में अर्ली प्रेग्नेंसी के कारण कभी-कभी इस तरह के मामले सामने आते हैं। क्योंकि महिलाओं की नसबंदी को लेकर वह जो जांच कराते हैं, उसकी किट से खून-पेशाब की जांच हार्मोन चेक करने के लिए होती है। इसमें अर्ली प्रेग्नेंसी का पता नहीं चल पाता।
-डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ