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Gonda News: झूठा निकला अपहरण का केस, 16 साल बाद केरल से मिला

Tue, 21 Feb 2023 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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परिजनों संग केरल से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे कोटेदार निजामुद्दीन, साथ में ग्राम प्रधान। - संवाद
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मोतीगंज (गोंडा)। सोलह वर्ष पहले गोंडा से रहस्यमय ढंग से लापता हुए एक कोटेदार का सुराग लगा। मंगलवार को केरल के मकतब से वह सही सलामत मिल गया। ग्राम प्रधान और परिजन उसे लेकर एयरपोर्ट से गोंडा के लिए रवाना हो गए। कोटेदार के भाई ने गांव के ही छह लोगों के खिलाफ थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया था। चुनावी पेशबंदी के दौरान दर्ज हुए अपहरण के इस केस में एक आरोपी को जेल भेजा गया था। तीन बार की विवेचना में पुलिस और सीबीसीआईडी ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
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मोतीगंज के सीहा गांव के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बबलू मिश्र ने बताया कि सीहा गांव निवासी कोटेदार निजामुद्दीन 2 अक्तूबर 2007 को रहस्यमय ढंग से लापता हो गए थे। कोटेदार के भाई मोहम्मद उमर ने 1 मार्च 2008 को गांव के 6 लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। प्रधान प्रतिनिधि के मुताबिक केरल से कोटेदार के भाई मोहम्मद उमर के पास कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने बताया कि केरल में कसरागोड़ के मकतब में उसका भाई निजामुद्दीन रह रहा है। सूचना पर मोहम्मद उमर समेत परिवार के अन्य लोग केरल गए और उसे संग लेकर गोंडा के लिए रवाना हुए हैं।
प्रधान प्रतिनिधि बबलू मिश्र ने बताया कि निजामुद्दीन को लाने के लिए वह भी गांव के कई लोगों के संग लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे हैं। कोटेदार के सोलह वर्ष बाद घर वापसी पर परिजनों में खुशी का माहौल है।
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इनके खिलाफ दर्ज था मुकदमा
सीहागांव के पूर्व प्रधान बृजराज मिश्र, रामसूरत, अब्दुल हफीज, राजबहादुर, रमजान, सईद के खिलाफ तत्कालीन थानाध्यक्ष रमाशंकर सरोज ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। मामले में अब्दुल हफीज को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। विवेचना मोतीगंज पुलिस से स्थानांतरित होकर देहात कोतवाली व नगर कोतवाली में गई जिसमें कोतवाली नगर के तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक रामआसरे द्विवेदी ने साक्ष्य के अभाव में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद विवेचना स्थानांतरित होकर सीबीसीआडी गोरखपुर मिली। सीबीसीआईडी के विवेचक ने भी 16 जनवरी 2015 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिससे शेष पांच आरोपी जेल जाने से बच गए थे।
ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहींसीहांगाव निवासी अब्दुल हफीज ने बताया कि जो जुर्म नहीं किया था, तत्कालीन थानाध्यक्ष रमाशंकर सरोज ने लाठियों के दम पर उसे जबरन कबूल कराया। मुझे अपहरण जैसे गंभीर अपराध के आरोप में जेल भेज दिया था। 1 माह आठ दिन तक जेल में रहा, उसके बाद जमानत हुई, जबकि मामले में कई जांच हुई और काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब वह मिल गया। कहा ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं। मुझ पर जो झूठा दाग लगा था, वह अल्लाह के करम से साफ हो गया।
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