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26.88 रुवये वेतन के लिए 55 साल से लड़ रहे कमला प्रसाद

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गोंडा। 55 साल से संघर्ष कर रहे 76 वर्षीय एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारी को हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी 26.88 रुपया बकाया वेतन नहीं मिल सका है। 34 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट से पक्ष में फैसला आने के बावजूद अभी तक उसे एक पैसा भी नहीं मिला। उप श्रमायुक्त गोरखपुर की ओर से जारी वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) गोंडा सदर तहसील में 26 साल तक गुम रही। विभाग का रवैया शुरुआत से बहुत खराब रहा। पिछले चार साल से बिजली विभाग के अधिकारी पत्रावली के निरीक्षण के बहाने मामले को टाल रहे हैं।
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बात साल 1967 की है जब गोंडा का बिजली विभाग अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण सर्किल गोरखपुर के अधीन था। तब तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ने 27 जनवरी 1967 को गोरखपुर के निवासी कमला प्रसाद पांडेय को 139 रुपये प्रतिमाह वेतन पर अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड गोंडा के कार्यालय में सहायक स्टोर प्रभारी के पद पर नियुक्ति की थी। चार फरवरी से छह दिसंबर 1967 तक यहां काम करने के बाद उनका तबादला गोरखपुर हो गया। मगर उन्हें स्थानांतरण के समय एक से छह दिसंबर 1967 का वेतन 26.88 रुपये नहीं मिला। इसके लिए करीब 34 साल पहले श्रम न्यायालय गए और अभी तक कई आदेशों के बाद भी भुगतान नहीं हो सका है। कमला साल 2005 में सेवानिवृत्त हो गए थे। (संवाद)
1988 में पहुंचे थे श्रम न्यायालय
20 साल तक संघर्ष करने के बाद कमला ने 1988 में श्रम न्यायालय गोरखपुर में याचिका दाखिल कर विद्युत वितरण खंड प्रथम गोंडा से ब्याज समेत बकाया वेतन 26.88 रुपये दिलाने की मांग की। अभिलेखों के आधार पर अदालत ने माना कि बकाया वेतन 26.88 रुपये विभाग ने नहीं दिया है। 14 मार्च 1992 को बकाया वेतन 26.88 रुपये भुगतान तिथि तक 12 फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। साथ ही वाद के लिए 50 रुपये अदा करने का आदेश दिया। भुगतान न होने पर फिर 28 जुलाई 1993 को श्रमायुक्त ने 867.90 रुपये की वसूली अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम गोंडा से करने का आदेश दिया, लेकिन कुछ नही होने पर 17 साल बाद फिर उप श्रमायुक्त ने छह सितंबर 2010 को 4514 रुपये की वसूली के लिए डीएम गोंडा को आरसी भेजी। याची श्रमिक को रकम देने से पूर्व उप श्रमायुक्त ने 20 दिसंबर 2020 व 20 फरवरी 2021 को अधिशासी अभियंता को नोटिस भेजा। 19 अगस्त 2018 को उप श्रमायुक्त के आदेश के अनुसार बकाए की रकम 14 हजार 35 रुपये हो गई। कमला की मानें तो 26.88 रुपये से बढ़कर अब यह रकम 23 हजार रुपये से भी अधिक हो चुकी है। लेकिन भुगतान नहीं हो सका है।
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मुझे इस केस के बारे में जानकारी नहीं है। कोई नोटिस अथवा सूचना मिलेगी तो विधिक परीक्षण कराकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
राधेश्याम भास्कर, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम गोंडा
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