गोंडा। कोरोना संक्रमण के संकट काल में अपनी जान पर जोखिम में डालकर उखड़ती सांसों को थामने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। इन्हें मानदेय देने के लिए नगर पालिका परिषद व स्वास्थ्य विभाग दोनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
कोरोना संक्रमण के दौरान जिला स्वास्थ्य समिति ने 27 अप्रैल 2021 को कोविड अस्पताल के लिए छह वेंटीलेटर टेक्नीशियन की नियुक्ति की गई थी। कोविड-19 महामारी के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए राज्य वित्त आयोग ने स्थानीय निकाय के खाते में 149.50 करोड़ रुपये दिए थे। जिसमें से रोकथाम के इंतजाम के साथ ही इन कर्मियों को मानदेय भी दिया जाना था।
कोरोना का प्रकोप खत्म होते जुलाई 2022 से स्थानीय निकाय ने मानदेय देना भी बंद कर दिया। इनकी ड्यूटी कोविड अस्पताल से हटाकर जिला अस्पताल के पीआईसीयू में लगा दी गई। इन्हें मानदेय देने की जिम्मेदारी से दोनों विभाग मुकर रहे हैं।
भटक रहे स्वास्थ्यकर्मी
वेंटीलेटर टेक्नीशियन के रूप में तैनात पवन मिश्र, हजारी लाल, पंकज पांडेय, बृजेश, भागीरथ व कुलदीप दूबे अपनी नौकरी बचाने के लिए डीएम व सीएमओ दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक इनको राहत नहीं मिल सका।
इन कर्मियों को पहले नगरपालिका से मानदेय मिलता था। स्वास्थ्य विभाग से इन कर्मियों को मानदेय देने के लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है। जिला स्वास्थ्य समिति में निर्णय के बाद मानदेय प्रदान किया जाएगा।
- डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ