गोंडा के जिला अस्पताल स्थित पीआईसीयू में भर्ती बच्चे। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। डेंगू व बुखार के साथ ही अब बच्चों में बढ़ती निमोनिया की बीमारी भी लोगों को डराने लगी है। इसकी गिरफ्त में आकर एक वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चे विशेषतौर पर तेजी के साथ बीमार पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन करीब डेढ़ सौ बच्चे ठंड व जकड़न की शिकायत के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जांच में इनमें से 50 से अधिक बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में सूजन) से पीड़ित मिल रहे हैं। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में निमोनिया की पुष्टि के बाद इलाज के लिए 30 बच्चों को भर्ती किया गया है। मंगलवार को ओपीडी में 70 निमोनिया पीड़ित बच्चों का इलाज करने के साथ ही इनमें गंभीर मिले दो बच्चों को बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में आरएसवी (रिस्पायरेटरी सेंसटियल वायरस) नाम का वायरस बच्चों के फेफड़ों में सूजन पैदा कर देता है। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। इस बीमारी को ब्रोंकियोलाइटिस अथवा निमोनिया कहा जाता है। पीआइसीयू प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि वर्तमान में डेंगू व बुखार के साथ ही बच्चों में ठंड से होने वाली कोल्ड डायरिया व निमोनिया की बीमारी भी तेजी से अपना प्रकोप बढ़ाने लगी है।
इससे पीड़ित बच्चों की संख्या अचानक सरकारी व निजी अस्पतालों में बढ़ गई है। इनमें से अधिकांश बच्चे एक साल से कम उम्र के हैं। इन दिनों बच्चों में आरएसीवी वायरस तेजी से फैल रहा है, जिससे छह माह से कम उम्र वाले बच्चों में ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में सूजन) व उससे अधिक उम्र वाले बच्चों में निमोनिया (फेफड़ों का संक्रमण) हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने से इससे पीड़ित की मौत तक हो जाती है। बताया कि जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड के 20 और पीआईसीयू के 10 वार्ड वर्तमान में बीमार बच्चों के कारण पूरी तरह फुल हैं।
संजीवन बना पीआईसी यूनिट
पीआईसी यूनिट शुुरू होने से छोटे बच्चों को संजीवनी मिल रही है। चिकित्सक के मुताबिक, पीआईसीयू में उपलब्ध वेंटीलेटर व एचडीयू हाई डिपेंडेंसी यूनिट से गंभीर बच्चों को आसानी से इलाज मिल जा रहा है। अधिकांश बच्चे स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। पिछले तीन दिनों में आठ बच्चों को डिस्चार्ज किया गया।
बीमारी से बचने को बरते सावधानी
डॉ आफताब ने कहा कि बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए उनकी साफ-सफाई पर पूरा ध्यान दें। इस दौरान बच्चों को ठंड से बचाने के साथ ही उन्हें ताजा भोजन व शुद्ध पानी का ही सेवन कराए। नवजात को छह माह तक मां का दूध दें। बोतल का प्रयोग न कर बच्चे को कटोरी चम्मच से ही दूध पिलाए। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग भी अवश्य करें।