गोंडा। बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम लागूू होने के 12 साल बाद भी उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के नियम नहीं बन सके हैं। इससे आज भी 34 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। साल 2015 में जूनियर हाईस्कूलों में 604 शिक्षकों की सीधी भर्ती हुई, इसके बाद से शिक्षकों की तैनाती ही नहीं हो सकी है। इस कारण कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
नियमों के अनुसार कक्षा छह से ऊपर पढ़ाने के लिए वही अध्यापक पात्र होते हैं, जिन्होंने संबंधित विषय को स्नातक स्तर पर पढ़ा हो। किसी शिक्षक को प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में सामाजिक विज्ञान के पद पर पदोन्नति पाना है तो उसे इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र एवं राजनीत िविज्ञान विषयों में से किन्हीं दो विषय स्नातक स्तर पर पढ़ा होना चाहिए।
इसी तरह अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत विज्ञान एवं गणित के पद पर पदोन्नति के लिए अध्यापकों को संबंधित विषय स्नातक स्तर पर पढ़ा होना चाहिए। इसका ध्यान पदोन्नतियों के समय नहीं रखा गया।
जिसके कारण विषयों के आधार पर साल 2018 में सरप्लस शिक्षकों को हटा दिया गया। 14 अक्तूबर 2022 को परिषदीय शिक्षकों के अंतर जनपदीय स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए जारी आदेश में भी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद पर प्रतिस्थापित करने की बात लिखी है। लेकिन इसमें एनसीटीई से निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी करने का उल्लेख नहीं है।
जिले के एक हजार परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। इसके अलावा तीन सौ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। 421 जूनियर हाईस्कूलों में 387 में ही प्रधानाध्यापक हैं। 34 जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। पदोन्नति न होने से प्राथमिक स्कूलों को प्रधानाध्यापक ही नहीं मिल पा रहे हैं।
करीब 966 स्कूलों में सहायक अध्यापकों को ही प्रधानाध्यापक का प्रभार दे दिया गया है। पदोन्नति न होने से यह स्थिति बनी हुई है। बीते सात सालों से जिले में पदोन्नति ही नहीं हुई है। बीते 29 दिसंबर 2022 को शासन ने पदोन्नति के निर्देश दिए हैं। इसके बाद उम्मीद जगी है।