गोंडा। सर्वाइकल कैंसर विषाणु जनित बीमारी है जो आगे चलकर कैंसर में परिवर्तित हो जाती है। इसका इलाज संभव है और बचाव के लिए नौ से 14 वर्ष तक की किशोरियों के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। ब्रेस्ट कैंसर के पश्चात यही एक ऐसा कैंसर है जो बहुत तेजी से महिलाओं में फैल रहा है। ये बातें जिला कारागार की महिला बैरक में शनिवार को आयोजित जागरूकता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नितिन श्रीवास्तव ने कहीं।
जिला अस्पताल की चिकित्साधिकारी नूपुर पाल ने बताया कि गर्भाशय का कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) तब होता है जब कोशिकाएं गर्भाशय ग्रीवा के प्रवेशद्वार में असामान्य रूप से विकसित होती हैं। यह वायरस जनित रोग है और निचले गर्भाशय की गर्दन या संकीर्ण हिस्से में होता है। अनियमित एवं अत्यधिक रक्तस्राव, पेशाब के दौरान दर्द, मासिक धर्म चक्र में अनियमितता, रजोनिवृत्ति के बाद और पैल्विक परीक्षा के बीच होने वाली रक्तस्राव, असहनीय दर्द, भारी असामान्य पानी का निर्वहन का लक्षण दिखे तो महिला को चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर आज लाइलाज नहीं है। इसे पूरी तरह विकसित होने में 20 वर्ष तक का समय लगता है। 60 वर्ष तक महिलाओं की भी स्क्रीनिंग की जा सकती है। स्क्रीनिंग से ही यह प्राथमिक स्तर पर ही पता चल जाता है। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए। जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार सिंह व महिला बैरक प्रभारी रंजना शुक्ला ने बताया कि कारागार में 66 महिलाएं निरुद्ध हैं।