मंगलवार सुबह आठ बजे पुलिस फोर्स के साथ ही नगर पालिका, राजस्व व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम नजूल की जमीन गाटा-297 खाली कराने पहुंची तो नजारा देखकर लोग दहशत में आ गए। इस दौरान लोग रहम की दुहाई मांगते रहे। मगर नोटिस के बाद अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। मामूली कहासुनी के बाद करीब 11 बजे के बाद आंबेडकर चौराहे से कार्रवाई शुरू की गई। सबसे पहले नाले के बगल में बनाई गईं दुकानें तोड़ी गईं।
नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी संजय कुमार मिश्र ने बताया कि आंबेडकर चौराहे से मंडे नाला तक नजूल की जमीन पर बने 24 मकान व दुकान चिह्नित किए गए हैं। प्रशासनिक आधार पर दुकानों का ध्वस्तीकरण कराया जाना है। इसके लिए छह जेसीबी के साथ ही पुलिस फोर्स व राजस्व व प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की गई है। देर शाम तक दुकान व मकान तोड़े गए हैं।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मंडे नाले से आंबेडकर चौराहा और जेल रोड समेत आसपास इलाके में तमाशबीनों की भीड़ जुटी रही। ऐसे में पुलिस फोर्स की तैनाती के बावजूद आसपास पूरे दिन जाम की स्थिति रही।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अफसरों ने मिलीभगत कर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गईं। वर्षों बाद अधिकारियों ने हटवाने की कवायदें शुरू की तो भवन स्वामियों ने हाईकोर्ट तक गुहार लगाई। वहां से भी राहत न मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई है। मगर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आंबेडकर चौराहा जेल रोड पर दुकानें तोड़ने पहुंची टीम का आदर्श सिंह ने विरोध किया। उसका कहना था कि दुकान स्वामी उसके भाई को नोटिस नहीं दी गई है। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर का निर्देश मिलते ही पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।
एसडीएम सदर सुशील कुमार यादव ने बताया कि हाईकोर्ट व प्रशासनिक आधार पर कार्रवाई की गई है। कुल 24 दुकानें चिह्नित की गईं हैं। जिसके अतिक्रमण के हिस्से को खाली कराया जाएगा। बुधवार को भी अभियान जारी रहेगा।