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Gonda News: पंचायतों में प्रतिनिधि राज पर लगा ब्रेक

Fri, 10 Mar 2023 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा के जिला पंचायत सभागार में समीक्षा बैठक में मौजूद विधायक, एमएलसी व अन्य। -संवाद
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गोंडा। साल 2011 की तस्वीर एक बार फिर जिला पंचायत की बैठक में दिखी। तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने से रोका ही नहीं था बल्कि ब्लॉक परिसर में पुलिस तक लगा दी थी। शुक्रवार को जिला पंचायत की बैठक में सीडीओ एम. अरुन्मोली ने देखा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि के स्थान पर गैर निर्वाचित लोग आ गए हैं। उन्होंने शासनादेशों का हवाला देकर वास्तविक जनप्रतिनिधियों के ही बैठक मेें शामिल होने की बात कही। कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि का प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो सकता।
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जिला पंचायत की वार्षिक बैठक में जिला पंचायत सदस्यों के साथ ही ब्लॉक प्रमुख भी पदेन सदस्य हैं। जिनको बजट स्वीकृति में रहना होता है। मगर शुक्रवार को जब सीडीओ ने कड़े तेवर दिखाए और ब्लॉक प्रमुखों को ही आने को कहा। इस पर 16 ब्लॉक में सिर्फ दो ब्लाॅक प्रमुख बेलसर और छपिया ही शामिल हो सके। बाकी 14 ब्लॉकों के वास्तविक प्रमुख नहीं आ सके। इन ब्लॉक प्रमुखों के जो प्रतिनिधि आए थे, उन्हें निराश लौटना पड़ा। शुक्रवार को इसकी खासी चर्चा रही।
सीडीओ ने साफ कहा कि विकास के मुद्दे की बैठक में गैर निर्वाचित लोगों को शामिल किए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। यही नहीं पहली बार महिला जिला पंचायत सदस्यों की संख्या भी काफी हो गई।
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जिला पंचायत सदस्य अर्चना सिंह, रीतू पासवान, अंकिता सिंह, अनामिका सिंह, इंद्रावती, मालती देवी बैठक में आईं। मगर ब्लाॅक प्रमुख के प्रतिनिधि बैठक में हिस्सा नहीं ले सके। समिति का कोरम पूरा होने पर सीडीओ ने बैठक करा दी। उन्होंने महिला सदस्यों से संवाद किया और कहा कि आप लोग खुलकर बोलें, बताएं कि क्या हो सकता है। फिलहाल शुक्रवार की बैठक में जिले में किस तरह से प्रतिनिधि राज है, ये सामने आ गया।
गोंडा के जिलाधिकारी रहे राम बहादुर का कहना है कि जनता द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों को ही बैठकों में आने और कार्यालय मेें बैठने का अधिकार है। इस बाबत पंचायतीराज एक्ट में प्रावधान है। गैर निर्वाचित व्यक्तियों को कोई अधिकार नहीं है, मैंने डीएम रहते हुए सभी प्रावधानों को पंचायतों तक लागू किया था। वास्तविक लोगों को ही कानूनी अधिकार है कि वह विकास की योजनाओं पर चर्चा करें। पंचायतों में खड़ांऊ राज का खात्मा करना जरूरी है। इसे सख्ती से लागू करना चाहिए। सीडीओ का ये कदम सराहनीय है।
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