गोंडा। चेक पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए खाते से 10 लाख रुपये की धनराशि फर्जी पहचान पत्र पर खोले गए खाते में हस्तांतरित करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने फैसला सुनाया। फोरम ने इलाहाबाद बैंक (इंडियन बैंक) और ऐक्सिस बैंक को खाता धारक को छह प्रतिशत ब्याज के साथ 10 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। फोरम ने दोनों बैंकों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश का पालन न होने पर बैंकों को निर्णीत धनराशि पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा।
नगर के हाइडिल कालोनी निवासी दिनेश प्रताप सिंह व उनकी पत्नी मंजू सिंह ने अधिवक्ता सतीश कुमार पांडेय के माध्यम से 20 सितंबर 2016 को जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम में परिवाद प्रस्तुत कर कहा कि उनका एक संयुक्त खाता 202817573 इलाहाबाद बैंक की बस स्टेशन शाखा में है। इसके संचालन के लिए उन्होंने चेक बुक जारी कराया था जो 02 मई 2016 को चैक बाजार जाते समय कहीं गुम हो गई। इसकी सूचना देकर मंजू सिंह ने 017321 से 17340 संख्या के चेकों के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन बैक कर्मियों ने उक्त चेकों से आहरण पर रोक नहीं लगाया।
मंजू के अनुसार 21 जून 2016 तक उनके खाते में 12 लाख 87 हजार 880 रुपए था। जब उन्होंने 8 अगस्त 2016 को खाते से पैसा निकालना चाहा तब पता चला कि खाते से 26 जुलाई 2016 को चेक संख्या-017328 के जरिए 10 लाख का आहरण हो चुका है। छानबीन करने पर पता चला कि चेक धारक कौशल कुमार ने 10 जून 2016 को ऐक्सिस बैंक गोंडा शाखा में चेक संख्या 017229 से आठ लाख, 21 जून 2016 को चेक संख्या 017328 व 017339 प्रस्तुत किया गया, जिस पर धनराशि 10 लाख अंकित थी। हस्ताक्षर न मिलने के कारण यह सभी चेक अनादृत (डिसआर्नर) हो गए। इसके बाद कौशल कुमार ने अपने नाम से ही चेक संख्या 017328 को पुन: ऐक्सिस बैंक की गोंडा शाखा में 26 जुलाई 2016 को प्रस्तुत किया तो चेक क्लीयर हो गया और उनके संयुक्त खाते से 10 लाख आहरित हो गया।
मामले में दर्ज अभियोग की विवेचना में पता चला कि ऐक्सिस बैंक बाराबंकी में ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर कौशल कुमार ने खाता खुलवाया है। आटीओ कार्यालय से उसकी सत्यता की जांच में वह फर्जी निकला। बैंक व उच्चाधिकारियों के स्तर से कोई संतोषजनक उत्तर न मिलने पर परिवादियों ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली और बैंक कर्मियों की मिलीभगत, साजिश व सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद बैंक बस स्टेशन शाखा, ऐक्सिस बैंक गोंडा व ऐक्सिस बैंक शाखा निकट डीएम आवास बाराबंकी के खिलाफ परिवाद दाखिल कर अपनी फर्जी हस्ताक्षर के जरिए निकली रकम 10 लाख, शारीरिक, मानसिक कष्ट़ के लिए पांच लाख और व भागदौड़ के लिए 10 हजार रुपए दिलाने की मांग की।
फोरम की नोटिस पर विपक्षी इलाहाबाद बैंक, ऐक्सिस बैंक गोंडा व बाराबंकी के शाखा प्रबंधकों ने जवाब दाखिल कर परिवादी के कथनों को निराधार बताते हुए परिवाद को निरस्त करने की मांग की। सुनवाई के दौरान परिवादियों व बैंक के अधिवक्ताओं की ओर से की बहस व पेश किए साक्ष्य के आधार पर फोरम ने माना कि उपभोक्ता की जमा रकम की सुरक्षा का दायित्व इलाहाबाद बैंक पर है।
कूटरचित हस्ताक्षर वाले चेक से 10 लाख हस्तांरित करने से परिवादियों को क्षति हुई। जोकि उपभोक्ता सेवा में कमी का द्योतक है। फर्जी पहचान पत्र के आधार पर कौशल कुमार का खाता खोलने के लिए विपक्षी ऐक्सिस बैंक शाखा बाराबंकी उत्तरदायी है। इस प्रकार परिवादियों को हुई क्षति के लिए दोनों बैंक समान रुप से जिम्मेदार हैं।
निर्णय सुनाते हुए फोरम के अध्यक्ष रामानन्द, सदस्य सुभाष सिंह व सदस्या श्रीमती मंजू रावत ने आदेश दिया कि इंडियन बैंक और ऐक्सिस बैंक शाखा बाराबंकी एक माह के अंदर परिवाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत ब्याज के साथ 10 लाख रुपये परिवादियों को अदा करें। मानसिक, आर्थिक क्षतिपूर्ति हेतु 20 हजार व वाद खर्च के लिए पांच हजार रुपए परिवादी को अदा करना होगा। दोनों बैंक नियत समय में निर्णीत धनराशि में से 50-50 फीसदी धनराशि उपभोक्ता फोरम के खाते में जमा करेंगे। फोरम के आदेशानुसार नियत अवधि में भुगतान न होने पर वास्तविक भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा।