बजाज चीनी मिल इटईमैदा ने 24 दिसंबर के बाद से अभी तक किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। भुगतान न कर बजाज चीनी मिल 30 हजार गन्ना किसानों के 73 करोड़ रुपये दबाए बैठी है। बजाज चीनी मिल प्रबंधन की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए डीएम ने शिकंजा कस दिया है।
टैगिंग आदेश के तहत मिल का चीनी व शीरा प्रशासन ने कब्जे में ले लिया है। प्रशासन की अनुमति के बगैर मिल प्रबंधन यह चीनी व शीरा नहीं बेंच सकेगा। इस चीनी व शीरा की बिक्री कर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने शुक्रवार को बताया कि बीते दिन डीएम प्रीति शुक्ला ने जिले के तीनों चीनी मिलों के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान की गहन समीक्षा की। इस दौरान तीनों मिलों के अध्याशी बैठक में मौजूद रहे।
डीएम ने बजाज चीनी मिल इटईमैदा द्वारा 24 दिसंबर से किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान न करने पर कड़ी नाराजगी जताई। 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बजाज चीनी मिल करीब 30 हजार किसानों के 73 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर सकी है।
प्रशासन की बिना अनुमति के बजाज चीनी मिल प्रबंधन चीनी व शीरा की बिक्री नहीं कर सकेगा। डीएम ने बजाज चीनी मिल के पेराई सत्र 2015-16 के चीनी, शीरा, बैगास व प्रेसमड स्टाक को अध्याशी बजाज चीनी मिल इटईमैदा के साथ एसडीएम उतरौला व सहकारी गन्ना विकास समिति उतरौला के सचिव दिनेश चंद्र श्रीवास्तव की अभिरक्षा में कर दिया है। डीसीओ, एसडीएम उतरौला रामकेर यादव व चीनी मिल प्रबंधक के संयुक्त खाते में बेचे गए चीनी व शीरा का भुगतान किया जाएगा।
चीनी स्टाक के बंधक पर चीनी मिल को प्राप्त होने वाली राशि का 85 प्रतिशत अंश संयुक्त रूप से खोले गए गन्ना मूल्य के खाते में स्थानांतरित कराकर इसी अकाउंट से किसानों के खातों में बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान शुरू कर दिया गया है।
डीएम के आदेश का उल्लंघन करने पर चीनी मिल के खिलाफ सुसंगत धाराओं में विधिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि बलरामपुर चीनी मिल व शुगर कंपनी तुलसीपुर ने पेराई सत्र में नियमित भुगतान किया है।