गोंडा। बैनामे के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने के सात साल पुराने मामले में आरोपी अधिवक्ता राकेश कुमार त्रिपाठी की जमानत याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ से खारिज हो गयी। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सह अभियुक्त बृजेश कुमार अवस्थी ने न्यायालय में तथ्य छिपाकर आदेश प्राप्त कर लिया है। इसलिए याची को उसकी जमानत का लाभ नहीं मिल सकता। इसी कोर्ट में 26 मार्च 2023 एक अन्य सह अभियुक्त महेंद्र प्रताप सिंह की जमानत याचिका निरस्त हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादिनी सुंदरपती ने 22 मार्च 2016 को नगर कोतवाली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा कि वह ग्राम पंचायत पथवलिया स्थित अपनी भूमि पर विगत 24 वर्षों से काबिज है। तीन जुलाई 2015 को वह तहसील में खतौनी लेने गई तो पता चला कि उसके स्थान पर राजकुमारी पत्नी अशोक कुमार निवासी जाजमऊ कानपुर व हाल पता सिविल लाइंस गोंडा का नाम दर्ज हो गया है। 15 जुलाई 1969 में हुए किसी कथित बैनामे के आधार पर यह नामांतरण हुआ है। जब उसने रजिस्ट्री ऑफिस में मुआयना कराया तो वह बैनामा वहां दर्ज नहीं पाया गया। बाद में पता चला कि कोतवाली देहात क्षेत्र के निवासी बृजेश कुमार अवस्थी ने उसकी जमीन हड़पने की नीयत से धोखाधड़ी व जालसाजी की है।
राजकुमारी ने 20 जून 2018 को बृजेश कुमार अवस्थी, नगर नगर क्षेत्र की विष्णुपुरी काॅलोनी निवासी अधिवक्ता राकेश कुमार त्रिपाठी, करनैलगंज के सकरौरा निवासी महेंद्र प्रताप सिंह व शहर के मालवीय नगर निवासी अनिल कुमार सिंह के पक्ष में वसीयतनामा पंजीकृत कराया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी राकेश कुमार त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था। सत्र न्यायालय ने आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी।