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Gonda News: अस्पताल आने से रोका तो भड़की आशा कार्यकर्ता

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गोंडा के जिला महिला अस्पताल में शुक्रवार को हड़ताल के दौरान लगी मरीजों व तीमारदारों की भीड़। -संव - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला महिला अस्पताल में बिना निर्धारित वर्दी व आईडी के प्रवेश कर रही आशा कार्यकर्ता को रोकना सुरक्षा गार्डों को भारी पड़ा। भड़की आशा कार्यकर्ता ने हंगामा काटते हुए दोनों गार्डों पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए पुलिस को बुला लिया। पुलिस दोनों गार्डों को पूछताछ के लिए साथ ले गई। इसके विरोध में अस्पताल के कर्मचारियों व चिकित्सकों ने दोपहर 12 बजे से कामकाज ठप कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे अस्पताल में पूरे दो घंटे तक जरूरतमंद मरीजों को इलाज सुविधा न मिल पाने से परेशानी उठानी पड़ी।
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दोपहर 12 बजे शुरू हुए हंगामे के बाद पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी तक में मौजूद स्वास्थ्य कर्मी व चिकित्सक अपने कक्षों से निकलकर अस्पताल परिसर में एकत्रित हो गए। दोपहर बाद ठप हुई स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण दूर-दराज से आने वाली गर्भवती व अन्य महिलाओं को बिना परामर्श व चिकित्सकीय जांच के ही लौटना पड़ा। गुलरिहा निवासी कुसुमा व निर्मला ने बताया कि वह खून जांच की रिपोर्ट लेने आई थी, लेकिन यहां हंगामा होने के कारण रिपोर्ट मिलने वाले कक्ष में ताला लगा है। कुर्था की वंदना सिंह ने बताया कि उसका नंबर आने से पहले ही डॉक्टर ओपीडी कक्ष से बाहर चली गई। अब दिखाने के लिए फिर आना पड़ेगा।
हंगामे की शुरुआत दोपहर में सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह के राउंड के दौरान हुई। इसी दौरान अस्पताल पहुंची काजीदेवर सीएचसी के हारीपुर पथवलिया की आशा बहू शांती पांडेय ने अस्पताल गेट से अंदर आने की कोशिश की। निर्धारित वर्दी व बिना आईडी कार्ड के साथ पहुंची आशा कार्यकर्ता को गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड जय कुमार और रोहित ने रोक दिया। इस पर भड़की आशा कार्यकर्ता ने हंगामा काटते हुए दोनों सुरक्षा गार्डों से भिड़ गई। उसने सुरक्षाकर्मियों पर हाथ पकड़कर धक्का देने व अभद्रता बरतने का आरोप लगाते हुए पुलिस को बुला लिया।
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इसकी जानकारी पर अस्पताल के कर्मचारी व चिकित्सक भी सुरक्षा गार्डों के समर्थन में एकजुट होकर आ खड़े हुए। उन्होंने काम काज ठप कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने इस पूरे मामले में सीएमओ स्तर से अपेक्षित सहयोग न मिलने का आरोप लगाया है। बताया कि शिकायत के बाद भी सीएमओ कार्यालय से किसी भी आशा बहू पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएमएस डॉ. सिंह ने बताया कि इस मामले में अस्पताल के नाराज कर्मियों को समझा बुझा कर पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
मनमानी रोकने को हुई सख्ती
दो माह से आशाओं की मनमानी की शिकायत लगातार बढ़ रही है। उन पर मरीजों का अपहरण करने, वसूली करने व निजी अस्पतालों में प्रसव के लिए जबरन भर्ती कराने तक के आरोप लग चुके हैं। इस पर प्रभारी तरह से रोक लगाने के लिए महिला अस्पताल में आशाबहूओं के प्रवेश के लिए निर्धारित ड्रेस कोड के साथ आईडी कार्ड दिखाने की अनिवार्यता को लागू कर रखा है। बताया कि अस्पताल में बिना किसी कामकाज के आशा बहू के प्रवेश पर भी सख्ती से रोक है। गेट पर आशाओं की ड्रेस व आईडी कार्ड चेक कर साथ आए मरीज का विवरण भी नोट कराया जा रहा है।
सीसीटीवी की होगी जांच
निर्धारित परिधान के बिना ही जबरन अस्पताल में प्रवेश करने पर रोके जाने के बाद आशा कार्यकर्ता ने हंगामा कर पुलिस को बुला लिया। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई। सीसी टीवी वीडियो के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जिस पक्ष की गलती सामने आई उसके खिलाफ कार्रवाई तय होगी। डॉ सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल
आशाओं के साथ हर रोज होती बदसलूकी
संस्थागत प्रसव को बढ़ाने में आशाओं की अहम भूमिका है। लेकिन अस्पताल आने पर हर रोज उनके साथ अभद्रता की जाती है। मरीजों का शोषण व वसूली यहां के डॉक्टर व कर्मचारियों की ओर से किया जाता है। उत्पीड़न हुआ तो संगठन इस मुद्दे पर आंदोलन को बाध्य होगा। उर्मिला दूबे, जिलाध्यक्ष आशा बहू एसोसिएशन
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