अमर उजाला फॉलोअपकिशोर व प्रसूता की मौत की तेज हुई जांच, दो एसीएमओ ने दर्ज किए बयान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। छपिया सीएचसी पर सर्पदंश पीड़ित किशोर व प्रसूता की मौत की जांच तेज हो गई है। बुधवार को एसीएमओ डॉ. सीके वर्मा व एसीएमओ डॉ. जयगोविंद की अगुवाई में जांच टीम ने सीएचसी पर पहुंचकर बयान दर्ज किए। जांच में 34 डोज एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होने की पुष्टि हुई।
छपिया थाना क्षेत्र के नरायनपुर निवासी अरुण कुमार (15) को सर्पदंश के बाद एंटी स्नेक वेनम की डोज न मिलने से जान चली गई। जबकि सीएचसी पर प्रर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की डोज उपलब्ध है। विशेषज्ञों की मानें तो सर्पदंश के बाद गोल्डन ऑवर (एक घंटे में) एंटी स्नेक वेनम की डोज लगने से पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। लेकिन छपिया सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम की 34 डोज उपलब्ध होने के बावजूद आयुष डॉक्टर ने टिटनेस का इंजेक्शन लगाकर 54 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जहां पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है। ऐसे में दर्जी कुआं पहुंचते ही किशोर की मौत हो गई।
छपिया थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत चारू के परसादूला निवासी राधिका (24) के प्रसव के बाद मौत होने पर भी डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगे थे। दोनों मामलों की जांच करने पहुंची टीम ने सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए। आयुष चिकित्सक डॉ. संजय कुमार से एंटी स्नैक वेनम न लगाने का कारण पूछा गया। जिस पर डॉक्टर ने सर्पदंश के लक्षण न मिलने का हवाला दिया। वहीं दोनों मामलों में परिजनों का बयान भी दर्ज किया। एसीएमओ डॉ. जय गोविंद ने बताया कि विभिन्न बिंदुओं पर जांचकर सीएमओ को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। दोषी मिलने पर आरोपी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।