गोंडा। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। सोमवार को सिजेरियन प्रसव के बाद एक और प्रसूता की मौत हो गई। पांच दिन में तीसरी मौत से चिकित्सक भी हैरान हैं। सीएमओ ने मामले की जांच की बात कही है। वहीं, प्रसव के बाद गंभीर हालत होने पर 11 प्रसूताओं को रेफर किया जा चुका है।
विगत 14 जून को केशवपुर पहड़वा निवासी नंदिनी गिरी की सिजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाकर जमकर हंगामा काटा था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। उसके दूसरे दिन 16 जून को हलधरमऊ के भटनैया निवासी नंदिनी दूबे की सिजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई। अब सोमवार को बरुआचक निवासी अनिल जायसवाल की पत्नी प्रियंका जायसवाल की इसी तरह सिजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई।
प्रसव पीड़ा होने पर प्रियंका को रविवार सुबह जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोपहर को ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ। तब तक जच्चा-बच्चा बिल्कुल स्वस्थ थे। सोमवार भोर तीन बजे प्रियंका की हालत अचानक खराब हो गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत उसे रेफर कर दिया। महिला अस्पताल में 300 मीटर दूर स्थित निजी अस्पताल में पहुंचते ही प्रियंका ने दम तोड़ दिया। तीमारदारों ने डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इस पर सीएमओ ने मामले की जांच की बात कही है।
जिला महिला अस्पताल में पिछले पांच दिन में इसी तरह अचानक हालत बिगड़ने पर नौ प्रसूताओं को रेफर किया गया है। इनमें कई की हालत नाजुक बताई गई है। अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद अलीकुननिशा, सुनीता, प्रीति, मधु, डॉली को रेफर किया गया, जबकि प्रसव के पहले बिना भर्ती किए ही गर्भवती गुड़िया, पल्लवी, रंजना, संगीता, राबिया और सावित्री को गंभीर बताकर बाहर भेज दिया गया।
सिजेरियन प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ रहता है, फिर अचानक प्रसूता को तेज बुखार आता है और मौत हो जाती है। इसी तरह की समस्या कई प्रसूताओं को होने से सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा व अन्य चिकित्सक हैरान हैं। सीएमओ ने कहा- इस बिंदु पर भी जांच कराई जाएगी कि कहीं किसी दवा व ग्लूकोज की वजह से तो दिक्कत नहीं हो रही है।