मनकापुर (गोंडा)। बड़े व्यवसाई को आय प्रमाण पत्र में गरीब दिखाकर सरकारी लाभ पहुंचाना लेखपाल को महंगा पड़ गया। शिकायत के बाद तहसीलदार ने मामले की जांच की और लेखपाल को दोषी करार दिया।
एसडीएम राजीव मोहन सक्सेना ने लेखपाल का चार्ज मनकापुर सदर क्षेत्र से हटाकर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। शास्त्री नगर कस्बा मनकापुर निवासी उद्यमी ने बीमारी की हालत में आर्थिक सहायता के लिए लेखपाल की मदद से गरीब होने का आय प्रमाणपत्र बनवा लिया। आरोप है कि उद्यमी के पास बाजार में तीन मंजिला मकान, आरा मशीन, मैरिज लाॅन, चार पहिया वाहन व मिठाई की दुकान मौजूद है।
उनके आवेदन पर क्षेत्रीय लेखपाल प्रेमशंकर आर्य पर बिना जांच के ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता राशि दिलाने का आरोप है। शिकायत मिलने पर डीएम ने एसडीएम को जांच का आदेश दिया। एसडीएम ने तहसीलदार से जांच कराई। एसडीएम ने प्रथम दृष्टया दोषी लेखपाल के खिलाफ अनुशासनात्मक व विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से मनकापुर सदर से हटा दिया। वहीं, लाभार्थी से आर्थिक सहायता की वसूली के लिए भी अलग से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसडीएम राजीव मोहन सक्सेना ने बताया कि जांच में दोषी मिलने पर लेखपाल प्रेम शंकर को सदर क्षेत्र से हटा दिया गया है। सरकारी सहायता, आर्थिक सहायता सिर्फ पात्र गरीबों के लिए है। तथ्य छिपाकर लाभ लेने व दिलाने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।